Tuesday, February 3, 2026
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मुस्लिम युवा की अनोखी साधना: झुंझुनूं के डॉ. जुल्फिकार ने स्वामी विवेकानंद पर की पीएचडी, 70 हजार से ज्यादा कैलेंडर बांट गांव-गांव जगा रहे युवा चेतना

झुंझुनूं: जिले के भीमसर गांव से निकली एक प्रेरणादायक कहानी आज देशभर में चर्चा का विषय बन रही है। स्वामी विवेकानंद के विचारों से गहराई से प्रभावित मुस्लिम युवा डॉ. जुल्फिकार ने न केवल विवेकानंद के जीवन और दर्शन पर पीएचडी की, बल्कि उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पांच पुस्तकें लिखीं और अब तक 70 हजार से अधिक विवेकानंद कैलेंडर नि:शुल्क वितरित कर चुके हैं। उनका यह प्रयास धर्म से ऊपर उठकर राष्ट्रनिर्माण, मानवता और युवा चेतना को नई दिशा दे रहा है।

विवेकानंद को आदर्श मानने वाला मुस्लिम युवा

भीमसर गांव निवासी डॉ. जुल्फिकार मुस्लिम समुदाय से होने के बावजूद स्वामी विवेकानंद को अपना जीवन आदर्श मानते हैं। वे कहते हैं कि विवेकानंद के विचार किसी एक धर्म, जाति या समुदाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे मानवता, आत्मबल, राष्ट्रवाद और युवाशक्ति को जागृत करने वाले सार्वभौमिक विचार हैं। बीते कई वर्षों से वे गांवों और ढाणियों में जाकर युवाओं से संवाद कर रहे हैं और उन्हें विवेकानंद के विचारों से जोड़ रहे हैं।

11 वर्ष की उम्र में शुरू हुआ विवेकानंद से जुड़ाव

डॉ. जुल्फिकार का विवेकानंद दर्शन से जुड़ाव महज 11 वर्ष की उम्र में शुरू हो गया था, जब वे रामकृष्ण मिशन के पुस्तकालय में अखबार पढ़ने जाया करते थे। धीरे-धीरे यह रुचि स्वामी विवेकानंद के जीवन, उनके भाषणों और ग्रंथों के अध्ययन में बदल गई। यही अध्ययन आगे चलकर उनके जीवन की दिशा तय करने वाला साबित हुआ।

विवेकानंद पर पीएचडी, देश के पहले मुस्लिम शोधार्थी होने का दावा

डॉ. जुल्फिकार का दावा है कि वे रामकृष्ण मिशन खेतड़ी से संबंधित विषय पर पीएचडी करने वाले देश के पहले मुस्लिम युवा हैं। उन्होंने वर्ष 2005 से 2009 के बीच स्वामी विवेकानंद पर गहन शोध किया। यह शोध केवल अकादमिक उपलब्धि नहीं रहा, बल्कि उनके सामाजिक और वैचारिक जीवन की नींव बन गया।

70,235 विवेकानंद कैलेंडर, युवाओं तक पहुंचा संदेश

पिछले सात वर्षों से डॉ. जुल्फिकार स्वामी विवेकानंद के प्रेरक संदेशों से युक्त कैलेंडर नि:शुल्क वितरित करने का अभियान चला रहे हैं। अब तक 70,235 से अधिक कैलेंडर राजस्थान के झुंझुनूं, जयपुर, अलवर, सीकर, चूरू, बीकानेर, हनुमानगढ़ सहित कई जिलों और दिल्ली में राजकीय व गैर-राजकीय विद्यालयों, मदरसों, वेद विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों तक पहुंच चुके हैं।

वे स्वयं भीमसर, नूआं, सिरियासर, आबूसर, अलसीसर, मलसीसर और टमकोर जैसे गांवों में जाकर युवाओं से संवाद करते हैं। उनके हाथ में नारे या प्रतीक नहीं, बल्कि किताबें होती हैं और शब्दों में केवल प्रेरणा।

विवेकानंद कैलेंडर 2026 का संदेश

विवेकानंद कैलेंडर 2026 सभी धर्मों के प्रति समान आदर, प्रेम और सहिष्णुता का संदेश देता है। इसका उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रीय एकता, भाईचारा और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना है। डॉ. जुल्फिकार का लक्ष्य एक लाख युवाओं तक स्वामी विवेकानंद के विचार पहुंचाना है।

2020 में RSS मुख्यालय से हुआ अभियान का शुभारंभ

विवेकानंद कैलेंडर अभियान की शुरुआत राष्ट्रीय युवा दिवस 2020 को स्वामी विवेकानंद की 158वीं जयंती पर नई दिल्ली स्थित RSS मुख्यालय केशव कुंज, झंडेवालान से हुई थी। इस अवसर पर RSS के वरिष्ठ नेता और थिंक टैंक इन्द्रेश कुमार सहित कई वरिष्ठ प्रचारक उपस्थित रहे थे। तभी से यह अभियान निरंतर जारी है।

तीन देशों में रामकृष्ण मठों में रहकर किया अध्ययन

डॉ. जुल्फिकार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के प्रोजेक्ट्स और अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों के तहत बांग्लादेश, श्रीलंका और सिंगापुर की यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने इन देशों के रामकृष्ण मठों और मिशन संस्थाओं में रहकर अध्ययन किया। उनका दावा है कि वे इन मठों में रहकर अध्ययन करने वाले पहले भारतीय मुस्लिम प्रोफेसर हैं। इसके अलावा उन्होंने वेलूर मठ सहित देश के 50 से अधिक रामकृष्ण मठों और मिशन संस्थाओं में स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण मिशन के सामाजिक कार्यों का गहन अध्ययन किया है।

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