पिलानी: प्रसिद्ध एलर्जी एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ विकास बड़सरा ने राजस्थान पेडिकॉन 2025 के राज्यस्तरीय सम्मेलन में अस्थमा और एलर्जी पर विशेष व्याख्यान दिया। इस दौरान उन्होंने अस्थमा के नवीनतम उपचार, रोकथाम के तरीके और जीना गाइडलाइन 2025 (GINA Guidelines 2025) में किए गए प्रमुख बदलावों पर विस्तार से जानकारी दी।
अस्थमा और एलर्जी पर नई गाइडलाइन से मिलेगा राहत का रास्ता
डॉ बड़सरा ने अपने व्याख्यान में बताया कि अस्थमा केवल एक श्वसन रोग नहीं, बल्कि यह जीवनशैली और पर्यावरण से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि GINA 2025 गाइडलाइन में अब व्यक्तिगत उपचार योजनाओं (Personalized Treatment) और स्मार्ट इन्हेलर तकनीक को प्राथमिकता दी गई है, जिससे मरीजों को लंबे समय तक राहत मिल सकती है।
अस्थमा के उपचार में नई तकनीक और रोकथाम के तरीके
डॉ विकास बड़सरा ने बताया कि अब एलर्जी से जुड़े अस्थमा के मामलों में इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy) और बायोलॉजिकल मेडिसिन्स का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन आधुनिक उपचार विधियों से न केवल दवा पर निर्भरता घटती है बल्कि मरीजों की जीवन गुणवत्ता (Quality of Life) भी बेहतर होती है।
बच्चों में अस्थमा की रोकथाम पर जोर
सम्मेलन के दौरान डॉ बड़सरा ने बच्चों में बढ़ते अस्थमा और एलर्जी के मामलों पर चिंता जताई। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चों को प्रदूषण, धूल और ठंडी हवा से बचाने के साथ-साथ समय पर निदान और नियमित फॉलोअप जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि बचपन से ही सही जीवनशैली अपनाने से अस्थमा का खतरा 40% तक कम किया जा सकता है।
राजस्थान पेडिकॉन 2025 में विशेषज्ञों की सहभागिता
राज्य के विभिन्न जिलों से आए विशेषज्ञों डॉ दीपेंद्र एचओडी आरयूएचएस, डॉ आसिफ एचओडी आरएनटी उदयपुर और निशांत डांग यूनिट हेड आरएनटी उदयपुर ने भी इस सम्मेलन में हिस्सा लिया। डॉ बड़सरा के सत्र में अस्थमा और एलर्जी के आधुनिक उपचारों पर हुई चर्चा को चिकित्सकों ने सराहा और कहा कि ऐसी गाइडलाइनें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इलाज की दिशा तय करने में मददगार साबित होंगी।






