Thursday, February 12, 2026
Homeदेशभारत-EU FTA से अमेरिका में हलचल जताई चिंता, ट्रंप प्रशासन का बयान...

भारत-EU FTA से अमेरिका में हलचल जताई चिंता, ट्रंप प्रशासन का बयान ट्रेड डील में भारत टॉप पर

नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर अमेरिका की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय ट्रेड पॉलिसी में नई बहस छिड़ गई है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है, ऐसे में ट्रंप प्रशासन से जुड़े अमेरिकी ट्रेड अधिकारी का बयान वैश्विक व्यापार संतुलन के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

भारत-EU FTA पर अमेरिका की प्रतिक्रिया से बढ़ी वैश्विक चर्चा

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को वैश्विक व्यापार के लिए एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। अमेरिका की बदलती ट्रेड पॉलिसी के बीच यह समझौता भारत को यूरोपीय बाजारों तक अधिक पहुंच दिला सकता है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।

EU डील में भारत को सबसे अधिक फायदा: जैमीसन ग्रीर

अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर ने कहा कि उन्होंने भारत-EU फ्री ट्रेड डील के कुछ अहम विवरणों की समीक्षा की है और प्रारंभिक आकलन के अनुसार इस समझौते से सबसे बड़ा लाभ भारत को मिलने वाला है। उनके अनुसार, इस डील से भारत को यूरोप के बाजारों में अधिक व्यापारिक पहुंच मिलेगी और भारत इस समझौते में शीर्ष लाभार्थी के रूप में उभर सकता है।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस समझौते में कुछ इमिग्रेशन राइट्स से जुड़े प्रावधान शामिल हो सकते हैं, जिससे भारतीय प्रोफेशनल्स और वर्कर्स को यूरोपीय देशों में रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।

अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी से यूरोप तलाश रहा नया बाजार

फॉक्स बिजनेस को दिए इंटरव्यू में जैमीसन ग्रीर ने कहा कि जब अमेरिका अपने घरेलू बाजार को प्राथमिकता देते हुए बाहरी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा रहा है, तब यूरोपीय यूनियन जैसे ट्रेड-डिपेंडेंट ब्लॉक को नए बाजार तलाशने की आवश्यकता पड़ रही है। इसी कारण EU भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार की ओर रुख कर रहा है।

उनका कहना था कि अमेरिका की घरेलू उत्पादन-केंद्रित नीति के चलते कई देश अपने उत्पादों के लिए वैकल्पिक बाजार खोजने को मजबूर हैं, और भारत इस बदलाव का प्रमुख लाभार्थी बन सकता है।

यूरोपीय यूनियन पर आलोचना, वैश्वीकरण को लेकर मतभेद

जैमीसन ग्रीर ने यूरोपीय संघ की ट्रेड नीति पर भी सवाल उठाए और कहा कि जब अमेरिका वैश्वीकरण से जुड़ी चुनौतियों को संतुलित करने का प्रयास कर रहा है, तब यूरोपीय ब्लॉक वैश्वीकरण को और अधिक बढ़ावा दे रहा है। उनके अनुसार, EU अत्यधिक ट्रेड-डिपेंडेंट है और इसलिए वह अमेरिका के बजाय भारत जैसे देशों के साथ बड़े व्यापारिक समझौते कर रहा है।

रूसी तेल, टैरिफ और भारत-EU ट्रेड डील का कनेक्शन

ग्रीर के बयान की टाइमिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने यूरोपीय यूनियन पर निशाना साधते हुए कहा था कि रूसी तेल के मुद्दे पर भारत पर दबाव बनाने में EU विफल रहा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी टैरिफ नीति के कारण ही भारत ने रूसी तेल की खरीद कम की, जबकि यूरोपीय देशों ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को वैश्विक ट्रेड पॉलिटिक्स के एक रणनीतिक कदम के रूप में स्थापित करता है।

- Advertisement -
समाचार झुन्झुनू 24 के व्हाट्सअप चैनल से जुड़ने के लिए नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करें
- Advertisemen's -

Advertisement's

spot_img
Slide
previous arrow
next arrow
Shadow
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

- Advertisment -

Recent Comments

error: Content is protected !!