चिड़ावा: पितृ पक्ष के अवसर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास वाणी भूषण पंडित प्रभुशरण तिवाड़ी ने कहा कि जब भक्त संसार के मोहजाल से निकलकर पूर्ण रूप से भगवान को समर्पित हो जाता है तो भगवान उसकी भावनाओं से तादात्म्य स्थापित कर उससे विवाह कर लेते हैं। भगवान का एक नाम विवाह भी है और जो भक्त सच्चे मन से उनका हो जाता है, भगवान भी उसे अपना बना लेते हैं।
कृष्ण–रुक्मणी विवाह की झांकी रही आकर्षण का केंद्र

कथा में रुक्मणी विवाह प्रसंग सुनाते हुए पंडित तिवाड़ी ने कहा कि रुक्मणी ने मन, वचन और कर्म से केवल कृष्ण को चाहा और भगवान ने उन्हें अपना जीवनसाथी बना लिया। इस अवसर पर कृष्ण–रुक्मणी विवाह की सजीव झांकी सजाई गई, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रही। कथा के दौरान महारास की वैज्ञानिक व्याख्या, कंस वध और उद्धव प्रसंग भी विस्तार से सुनाए गए।
भक्ति मय वातावरण में बही आनंद की धारा
भजनों और कीर्तन से कथा स्थल पर आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालु भावविभोर होकर भक्ति रस में डूब गए। तिवाड़ी ने कहा कि भगवान असीम दयालु हैं और सच्चे भक्त की हर पुकार को स्वीकार करते हैं।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ भागवत पूजन

कथा से पूर्व मुख्य यजमान रामवतार शर्मा, कलावती देवी और उनके परिवार ने नरेश जोशी, आमोद शर्मा और विक्रम शर्मा के वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य भागवत व व्यास पूजन किया। इस अवसर पर महेन्द्र शर्मा, अशोक शर्मा, प्रमोद शर्मा, अनिल शर्मा, वेद प्रकाश, सुशील कुमार, विनोद कुमार लाम्बीवाला, विनोद खंडेलवाल, कमल मोदी, सुरेश खंडेलवाल, मोतीलाल लांबीवाला, सांवरमल गहलोत, रामवतार शर्मा श्योपुरा, ओम प्रकाश कौशिक, योगेंद्र मिश्रा, राजीव शुक्ला, सुभाष लांबीवाला, कमल शर्मा, संजय शर्मा श्योपुरा, गोपाल लाठ, गोपाल सिंह सुलताना, राजेश दायमा, रतनलाल गोयल, सिद्धार्थ शर्मा और अजय शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला-पुरुष उपस्थित रहे।
प्रशासन और सामाजिक संगठनों का रहा सहयोग
आयोजन में भक्तों की भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवकों ने व्यवस्थाएं संभालीं। श्रद्धालुओं ने इसे आध्यात्मिक सौभाग्य बताया और कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज को भक्ति और संस्कृति से जोड़ते हैं।





