चिड़ावा: श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिवस भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग पर व्यास पीठ से प्रवचन देते हुए वाणी भूषण पंडित प्रभुशरण तिवाड़ी ने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है तब-तब भगवान पृथ्वी पर अवतार धारण करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म की स्थापना के साथ-साथ भगवान अपने भक्तों के श्राप अथवा वरदानों को सत्य करने के लिए भी अवतार लेते हैं।

पंडित प्रभुशरण तिवाड़ी ने भगवान श्रीराम के चरित्र का विस्तार से वर्णन करते हुए आह्वान किया कि प्रत्येक व्यक्ति को मर्यादा पुरुषोत्तम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए। कथा में भक्त राजा अंबरीश और गंगा अवतरण की कथा का भी मार्मिक वर्णन किया गया।
कथा पंडाल में सजाई गई राम-जानकी विवाह और कृष्ण जन्मोत्सव की सजीव झांकियों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। वहीं, सुरीले भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया और भक्तजन झूम उठे।

कथा से पूर्व मुख्य यजमान रामवतार शर्मा और कलावती देवी ने परिवार सहित वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भागवत एवं व्यास पूजन किया। इस अवसर पर महेंद्र शर्मा, अशोक शर्मा, प्रमोद शर्मा, अनिल शर्मा, वेद प्रकाश, सुशील कुमार, विनोद कुमार लाम्बीवाला, कमला प्रसाद मोदी, नृसिंह बाछुका, ओमप्रकाश बीजनेवाला, अरुण शर्मा सेहीकला, गोपाल चौहान, राजकुमार बीजनेवाला और श्यामसुंदर खंडेलवाल मौजूद रहे।
रामवतार शर्मा, गंगाधर शर्मा, विनोद पुजारी, इंद्र दायमा, सुनील ककरानिया, प्रदीप लांबीवाला, पूर्व नगरपालिका चेयरमैन शंकरलाल वर्मा, जय प्रकाश वर्मा, सेवानिवृत्त कोषाधिकारी ओमप्रकाश टेलर, सिद्धार्थ शर्मा, श्यामसुंदर साखुवाला, संजय शर्मा श्योपुरा और विश्वनाथ ढाढीटिया सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण किया।





