उत्तर प्रदेश: बिजनौर के नंदपुर गांव में एक कुत्ते द्वारा लगातार चार दिन से हनुमान और दुर्गा माता की मूर्ति की परिक्रमा करने की घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। बिना खाए-पिए गोल-गोल घूमते इस कुत्ते का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसके बाद भीड़ मंदिर में उमड़ने लगी है और लोग इसे आस्था तथा चमत्कार से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि विशेषज्ञ इसे गंभीर बीमारी का संकेत बता रहे हैं।
नंदपुर गांव में अनोखा नजारा, कुत्ते ने शुरू किया परिक्रमा
बिजनौर जिले की नगीना तहसील के नंदपुर स्थित पुराना हनुमान मंदिर बीते चार दिन से चर्चा का केंद्र बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार, एक कुत्ता 11 जनवरी की सुबह करीब चार बजे अचानक मंदिर पहुंचा और बजरंगबली की मूर्ति के चारों ओर लगातार घूमना शुरू कर दिया। स्थानीय व्यक्ति देवेंद्र कुमार ने बताया कि कुत्ता दिन हो या रात, लगातार घंटों तक घूमता दिखाई दिया और थक जाने पर मूर्ति के पास बैठ जाता था, लेकिन खाने-पीने का कुछ नहीं लेता।
लगातार हनुमान मूर्ति के चक्कर, फिर दुर्गा मंदिर की ओर किया रुख
गांव के रमेश सिंह का कहना है कि पहले दिन कुत्ता सिर्फ हनुमान मूर्ति के पास नजर आया, लेकिन दूसरे दिन उसने पास स्थित दुर्गा मंदिर की परिक्रमा भी शुरू कर दी। तीसरे दिन वह पूरे मंदिर प्रांगण का चक्कर लगाता देखा गया। यह घटना 36 घंटे से 72 घंटे के बीच रुक-रुककर जारी रही, जिससे ग्रामीणों की जिज्ञासा लगातार बढ़ती गई।
कबूतर कुत्ते पर बैठा, उड़ते ही हो गई मौत, श्रद्धालुओं का ‘चमत्कार’ का दावा
कई ग्रामीणों ने बताया कि घटना के दौरान एक कबूतर कुछ समय के लिए कुत्ते की पीठ पर आकर बैठ गया। आश्चर्य की बात यह है कि कबूतर कुछ देर बाद उड़ गया लेकिन थोड़ी देर बाद उसकी मौत हो गई। मंदर मार्ग से गुजर रहे संजय चौधरी और अनिल यादव का कहना है कि यह साधारण घटना नहीं है और गांव में इसे चमत्कार माना जा रहा है। स्थानीय लोग भजन-कीर्तन कर रहे हैं और इस घटना को ‘‘भगवान का संकेत’’ बताया जा रहा है।
भीड़ और सोशल मीडिया मचा रहे शोर, पुलिस भी तैनात
कुत्ते की परिक्रमा का वीडियो किसी व्यक्ति द्वारा मोबाइल में रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डाल दिया गया। वीडियो वायरल होते ही लोगों की भीड़ नंदपुर मंदिर पर जमा होने लगी। भीड़ बढ़ने से हालात बिगड़ने लगे तो पुलिसकर्मियों को भीड़ प्रबंधन में लगाया गया।
गांववाले अलग-अलग मान्यताओं से घटना को जोड़ रहे हैं। कुछ इसे भैरव बाबा की कृपा बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसे पशु में जागृत आस्था की मिसाल कह रहे हैं।
क्या यह बीमारी का लक्षण? विशेषज्ञ दे रहे चेतावनी
जहां श्रद्धालु इसे दिव्यता से जोड़ रहे हैं, वहीं जानवरों के चिकित्सक इसे गंभीर स्वास्थ्य समस्या मान रहे हैं।
वेटरनरी एक्सपर्ट्स के अनुसार कुत्तों में Canine Cognitive Dysfunction यानी डिमेंशिया मनुष्यों के अल्जाइमर जैसा होता है, जिसमें पशु बार-बार एक ही गतिविधि दोहराते हैं।
दूसरा कारण Canine Distemper Virus बताया जा रहा है, जो तंत्रिका तंत्र पर असर डालकर कुत्ते को गोल-गोल घूमने को मजबूर कर सकता है।
कुछ डॉक्टर इसे रेबीज के शुरुआती चरण से भी जोड़ रहे हैं, जिसमें जानवर का व्यवहार अचानक आक्रामक या विचित्र हो जाता है।
नंदपुर पहुंचे पशु चिकित्सक दीपक चौधरी की टीम ने कुत्ते की प्रारंभिक जांच की और उसकी हालत अभी सामान्य बताई, हालांकि विशेषज्ञ इलाज व निगरानी की सलाह दे रहे हैं।
तमिलनाडु से बिहार तक दिख चुके ऐसे मामले
इससे पहले तमिलनाडु के कृष्णागिरि मंदिर, बिहार और गोवा में भी इसी तरह कुत्तों के मंदिरों की परिक्रमा करने के वीडियो चर्चा में रहे। हर बार लोगों ने इसे आस्था और चमत्कार से जोड़कर देखा, जबकि वैज्ञानिक विश्लेषण में बीमारी की संभावना अधिक मानी गई।





