पिलानी/झुंझुनूं: बांग्लादेश में हिन्दू अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार, हत्याओं और महिलाओं के साथ निर्ममता की घटनाओं को लेकर अखिल भारत हिन्दू महासभा ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कड़ा रोष जताया है। संगठन ने कहा कि हाल के 19 दिनों में 5 हिन्दुओं की बर्बर हत्या और महिलाओं पर अमानवीय अत्याचार न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन हैं, बल्कि पूरी मानवता को शर्मसार करने वाले कृत्य हैं। इस मुद्दे पर भारत सरकार से ठोस और प्रभावी कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।
संयुक्त बयान में क्या कहा महासभा ने
अखिल भारत हिन्दू महासभा की ओर से जारी संयुक्त बयान में कोर कमेटी अध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला, राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष पवन कुमार पूनीया और महामंत्री भागीरथ सिंह पिलानियां ने कहा कि बांग्लादेश में लगातार बढ़ रही हिन्दुओं पर हिंसा की घटनाएं मानवता पर गहरा धब्बा हैं। उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों की हत्याएं और महिलाओं पर हो रहे अत्याचार अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर चेतावनी हैं।
“सिर्फ बयानबाजी से नहीं रुकेगा अत्याचार”
महासभा के सदस्यों ने स्पष्ट कहा कि अब केवल चिंता व्यक्त करने वाले बयान पर्याप्त नहीं हैं। उनका कहना है कि बांग्लादेश में हिन्दुओं की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। संगठन ने यह भी कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो हालात और अधिक भयावह हो सकते हैं।
प्रधानमंत्री से कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग
संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से पुरजोर अपील की गई कि वे बांग्लादेश में हो रहे हिन्दू उत्पीड़न के मामलों को गंभीरता से लेते हुए कूटनीतिक स्तर पर ठोस समाधान निकालें। महासभा का कहना है कि भारत को क्षेत्रीय शक्ति होने के नाते अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को मजबूती से उठाना चाहिए ताकि बांग्लादेश सरकार पर दबाव बनाया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों का उल्लंघन
महासभा ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दू समुदाय के साथ हो रही घटनाएं मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संगठनों से भी मांग की कि वे इस विषय पर संज्ञान लें और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए हस्तक्षेप करें।





