ढाका: बांग्लादेश के सिलहट जिले में हिंदू परिवार के घर पर कट्टरपंथियों ने आग लगा दी। हिंदुओं पर लगातार हमले, हत्या, घर जलाने और अल्पसंख्यक सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है।
बंगाल में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की लड़ी थमने का नाम नहीं ले रही
बांग्लादेश के सिलहट जिले के गोवाईघाट के नंदिरगांव संघ के बहोर गांव में कट्टरपंथियों ने बीरेंद्र कुमार डे के घर पर हमला कर आग लगा दी, जिससे पूरी संपत्ति जलकर राख हो गई। यह घटना तब सामने आई है जब देश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हमलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हिंसा का बढ़ता क्रम: घर जलाने से लेकर हत्या तक
बांग्लादेश में पिछले कई हफ्तों से हिंदू समुदाय को गंभीर हमलों का सामना करना पड़ रहा है। शरियतपुर जिले के तिलोई में 50 वर्षीय खोकन दास पर धारधार हथियार से हमला कर आग लगा दी गई थी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हुआ था। इसी क्रम में फेनी जिले में 28 साल के ऑटो ड्राइवर समीर कुमार दास को चाकू मारकर हत्या कर दिया गया। नौगांव जिले में भीड़ के हमले से बचने के लिए एक युवक नहर में कूद गया, लेकिन डूबने से उसकी जान चली गई। इन घटनाओं ने अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय में गहरा डर और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में भी चिंता की पुष्टि
अंतरराष्ट्रीय अधिकार समूह Rights and Risks Analysis Group की रिपोर्ट के अनुसार, केवल 1 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 के बीच कम से कम 15 हिंदू अल्पसंख्यकों की हत्या की गई है, जिनमें युवाओं और बुजुर्ग दोनों शामिल हैं। इस रिपोर्ट ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हमलों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया है।
पूर्व में भी हुए संगठित हमले
2025 में बांग्लादेश के गंगाचारा उपजिला में हिंदू पड़ोस के घरों पर बड़े पैमाने पर हमले और तोड़फोड़ की गई थी, जिसमें कई घरों को लूटा और आग के हवाले कर दिया गया था। इस तरह की घटनाएं दर्शाती हैं कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा कोई एकल घटना नहीं है, बल्कि लंबी अवधि से चल रहे तनाव का हिस्सा है।
सरकार की प्रतिक्रिया की आलोचना
बांग्लादेश के कार्यवाहक सरकार के प्रमुख मोहम्मद युनुस ने इन हमलों की रिपोर्ट को “प्रचार” करार देते हुए खारिज किया है, लेकिन हिंसा की बार-बार रिपोर्टें और विपक्षी तथा मानवाधिकार समूहों की चेतावनियों ने सरकार की आलोचना को तेज कर दिया है। भारत और यूरोपीय संघ सहित कई देशों और संगठनों ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
समाज और राजनीति पर असर
इन हमलों के चलते न सिर्फ बांग्लादेश में हिंदू समुदाय में भय का माहौल है, बल्कि भारत समेत कई देशों में भी इस मुद्दे पर विरोध और चिंता जताई जा रही है। इस पर भारतीय नेताओं और मानवाधिकार समूहों ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर बांग्लादेश सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की है।





