Monday, February 16, 2026
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दिल्ली कोचिंग हादसा: सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, कोचिंग सेंटर बने ‘मौत के कुएं’, केंद्र-दिल्ली सरकार को नोटिस जारी

दिल्ली कोचिंग हादसा: दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में कोचिंग सेंटर में यूपीएससी की तैयारी कर रहे तीन स्टूडेंट्स की दुखद मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ कर रही है।

कोचिंग सेंटर ‘डेथ चैंबर’ बन गए हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में हाल में घटी यह घटना सभी के लिए आंखें खोलने वाली है। कोर्ट ने कहा, “ये जगहें (कोचिंग सेंटर) ‘डेथ चैंबर (मौत का कुआं)’ बन गई हैं। कोचिंग संस्थान का तब तक ऑनलाइन संचालन किया जा सकता है, जब तक वे सुरक्षा मानदंडों और गरिमापूर्ण जीवन के लिए बुनियादी मानदंडों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित न करें। कोचिंग सेंटर देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले अभ्यर्थियों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं।”

घटना का विवरण

27 जुलाई को दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित राव एकेडेमी के बेसमेंट में अचानक पानी भरने से तीन छात्रों की मौत हो गई थी। यह हादसा अचानक हुई बारिश के कारण हुआ था, जिसमें लाइब्रेरी में पानी भर गया था। मृतकों में दो छात्र और एक छात्रा शामिल थे, जो यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे। मृतकों की पहचान तेलंगाना निवासी तान्या सोनी, केरल निवासी नेविन डाल्विन और यूपी निवासी श्रेया यादव के रूप में हुई।

हादसे की वजह

दिल्ली के मुख्य सचिव ने 29 जुलाई को दिल्ली सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें बताया गया कि राव कोचिंग संस्थान ने ड्रेनेज सिस्टम को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया था। साथ ही संस्थान में बचाव की कोई व्यवस्था नहीं थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कोचिंग सेंटर की पार्किंग की ऊंचाई आसपास की प्रॉपर्टी के मुकाबले कम थी, जिससे भारी बारिश के पानी को पार्किंग एरिया और बेसमेंट में जाने से रोकने के लिए कोई बैरियर वॉल नहीं थी। एमसीडी की रिपोर्ट में कोचिंग सेंटर बिल्डिंग के सुरक्षा कर्मचारियों की लापरवाही का भी जिक्र है, जिसके चलते पानी बिना रुके पार्किंग एरिया को पार कर बेसमेंट में घुस गया।

दिल्ली हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

दिल्ली हाईकोर्ट में भी इस मामले की सुनवाई हो चुकी है। 31 जुलाई और 2 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में डूबकर हुई तीन छात्रों की मौत पर अधिकारियों को फटकार लगाई थी। अदालत ने एमसीडी अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए और पूछा कि क्या अब तक किसी एमसीडी अफसर को हिरासत में लिया गया है और क्या इस मामले में एमसीडी के अधिकारियों की जांच हुई है?

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