चिड़ावा: शहर में इंडस्ट्रियल एरिया बाइपास रोड की नई बनाई गई सड़क दस दिन भी नहीं टिक पाई। ग्रामीण हाथों से सड़क उखाड़ते दिखे, जिससे पीडब्ल्यूडी की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ गए। लोगों ने सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार और घटिया सामग्री के उपयोग के आरोप लगाए।
महज दस दिन में बर्बाद हुई नई सड़क
इंडस्ट्रियल एरिया चिड़ावा में रिको बाइपास रोड लाखु आईटीआई से एलआईसी बिल्डिंग के बीच तैयार की गई नई सड़क बारिश और ट्रैफिक का दबाव झेलने के बजाय कुछ ही दिनों में फूलकर खराब हो गई। सड़क की मिट्टी और कोलतार की परत इतनी कमजोर निकली कि इलाके के ग्रामीण हाथों से उसे उखाड़ते दिखाई दिए जिसने निर्माण एजेंसी और विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए।
स्थानीय लोगों का आरोप — खराब सामग्री, भ्रष्टाचार और निगरानी की कमी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया और काम की निगरानी में गंभीर लापरवाही बरती गई। लोगों का आरोप है कि सड़क पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन गुणवत्ता नियंत्रण नाम की कोई व्यवस्था नहीं अपनाई गई। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क जनसुविधा के लिए जरूरी थी, मगर भ्रष्टाचार और उदासीनता के चलते सार्वजनिक धन बर्बाद होता दिख रहा है।
पीडब्ल्यूडी का दावा — नमी और मौसम की वजह से उखड़ी सड़क
आरोपों के बीच पीडब्ल्यूडी एक्सईएन रोहिताश्व कुमार का कहना है कि वर्तमान मौसम में अत्यधिक नमी और सड़क के नीचे सतह पर जमा पानी के कारण सड़क का हिस्सा उखड़ा है। उन्होंने बताया कि विभाग ने खराब हिस्से को दुरुस्त करने के निर्देश जारी कर दिए हैं और आगे निर्माण की गुणवत्ता की जांच भी की जाएगी। हालांकि विभागीय बयान ने लोगों के गुस्से पर कोई खास असर नहीं डाला और वे पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।
उठे सवाल — जिम्मेदारी तय होगी या मामला दबा दिया जाएगा?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण में हुई गड़बड़ी की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में सार्वजनिक धन की बर्बादी रुक सके। लोगों को आशंका है कि मामले को लीपापोती कर रफा-दफा कर दिया जाएगा, इसलिए वे खुली जांच और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।





