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डॉ. शकील अफरीदी की रिहाई की मांग फिर सुर्खियों में, अमेरिकी सांसद ब्रैड शेरमैन ने पाकिस्तान पर डाला दबाव

वाशिंगटन, अमेरिका: अमेरिका में 9/11 के आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को ढूंढ़ निकालने और मार गिराने में अहम भूमिका निभाने वाले पाकिस्तानी डॉक्टर शकील अफरीदी को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी कांग्रेस सदस्य ब्रैड शेरमैन ने अफरीदी की रिहाई की मांग करते हुए पाकिस्तान सरकार पर कड़ा दबाव बनाया है।

शेरमैन ने हाल ही में पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी के नेतृत्व में आए पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल से अपील की कि वे अफरीदी की रिहाई सुनिश्चित करवाने में हस्तक्षेप करें। उन्होंने इसे अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में विश्वास बहाली की दिशा में एक “सार्थक कदम” बताया, विशेषकर उन अमेरिकी परिवारों के लिए, जिन्होंने 2001 के आतंकी हमलों में अपने परिजनों को खोया था।

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कौन हैं डॉ. शकील अफरीदी?

डॉ. शकील अफरीदी पाकिस्तान के खैबर जनजातीय क्षेत्र में एक सरकारी चिकित्सक थे। वर्ष 2011 में अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA ने उनसे संपर्क किया और एक फर्जी हेपेटाइटिस-बी टीकाकरण अभियान के माध्यम से एबटाबाद में रह रहे लोगों के डीएनए नमूने जुटाने का जिम्मा सौंपा। दरअसल, यह वही इलाका था जहां ओसामा बिन लादेन छिपा हुआ था।

नेशनल जियोग्राफिक और बीबीसी की रिपोर्टों के मुताबिक, अप्रैल 2011 में अफरीदी ने एबटाबाद के उस किलेनुमा घर के दरवाजे पर दस्तक दी, जहां बिन लादेन मौजूद था। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने बिन लादेन के परिजनों से डीएनए नमूने हासिल किए या नहीं, लेकिन उनकी सूचनाओं से CIA को उस स्थान की पुष्टि करने में मदद मिली।

एबटाबाद ऑपरेशन: 2 मई 2011

2 मई 2011 को अमेरिकी नेवी सील्स की एक विशेष टीम ने पाकिस्तान के एबटाबाद में बिन लादेन के ठिकाने पर हमला किया और उसे मार गिराया। यह मिशन पूरी दुनिया के लिए चौंकाने वाला था और पाकिस्तान सरकार के लिए शर्मिंदगी का कारण बना। पाकिस्तान पर आरोप लगे कि वह इतने वर्षों तक बिन लादेन की मौजूदगी से अनभिज्ञ बना रहा।

गिरफ्तारी और 33 साल की सजा

बिन लादेन की मौत के महज 20 दिन बाद 23 मई 2011 को पाकिस्तानी अधिकारियों ने डॉ. अफरीदी को गिरफ्तार कर लिया। शुरुआत में उन पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया, लेकिन बाद में एक पाकिस्तानी अदालत ने उन्हें एक चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-इस्लाम को आर्थिक सहायता देने के मामले में दोषी ठहराया।

2012 में उन्हें 33 साल की जेल की सजा सुनाई गई, जिसे बाद में 23 साल कर दिया गया। इस सजा को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और अमेरिका ने “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” करार दिया था।

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अमेरिका-पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव

ब्रैड शेरमैन की इस अपील से एक बार फिर अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में गहराई से छिपे तनाव उजागर हो गए हैं। अमेरिका लंबे समय से अफरीदी को एक नायक मानता है, जबकि पाकिस्तान में उन्हें गद्दार का दर्जा दिया गया है।

अमेरिकी कांग्रेस और मानवाधिकार संगठन अफरीदी की गिरफ्तारी को न केवल नाइंसाफी मानते हैं, बल्कि यह भी कहते हैं कि पाकिस्तान आतंक के खिलाफ सच्चे सहयोग की मंशा नहीं रखता।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया का इंतजार

अब दुनिया की नजर पाकिस्तान सरकार पर टिकी है कि क्या वह अमेरिका की अपीलों पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया देती है या फिर अफरीदी की सजा बरकरार रखती है।

क्या पाकिस्तान इस “विश्वास की परीक्षा” में सफल हो पाएगा?
क्या डॉ. शकील अफरीदी को न्याय मिलेगा?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों की दिशा तय कर सकते हैं।

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