इस्लामाबाद: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान, बांग्लादेश, ईरान, नेपाल, रूस और इराक सहित 75 देशों के नागरिकों के लिए यूएस इमीग्रेशन वीजा प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। यूएस इमिग्रेशन पॉलिसी, वीजा प्रतिबंध, पाकिस्तान-अमेरिका संबंध, और ट्रंप प्रशासन से जुड़ा यह फैसला अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इस कदम के बाद पाकिस्तान में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है और इस्लामाबाद को उम्मीद है कि वीजा प्रक्रिया जल्द सामान्य होगी।
अमेरिका ने 75 देशों के लिए वीजा रोकने की सिफारिश क्यों की
व्हाइट हाउस ने कहा कि वीजा प्रक्रिया में रोक उन देशों पर लागू की जा रही है जिनके प्रवासी अमेरिका पहुंचकर सरकारी सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों का भारी उपयोग करते हैं। प्रशासन का दावा है कि यह नीति अमेरिकी जनता के हितों की रक्षा के लिए लागू की जा रही है और जब तक यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि नए आप्रवासी करदाताओं पर बोझ नहीं बनेंगे, इमिग्रेशन वीजा नहीं दिए जाएंगे।
अमेरिकी विदेश विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि यह कदम प्रशासनिक समीक्षा का हिस्सा है। बयान में कहा गया कि सरकार प्रवासियों द्वारा वेलफेयर सिस्टम के दुरुपयोग पर रोक लगाना चाहती है और अमेरिकी संसाधनों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
पाकिस्तान ने जताई उम्मीद, अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत जारी
पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने बताया कि इस्लामाबाद अमेरिकी अधिकारियों से लगातार संपर्क में है। अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान इसे अमेरिका की आंतरिक नीति समीक्षा मानता है और विश्वास करता है कि आप्रवासी वीजा प्रक्रिया जल्द फिर से शुरू होगी।
अंद्राबी ने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अमेरिका के साथ बेहतर द्विपक्षीय संबंधों की दिशा में प्रतिबद्ध है और यह निर्णय दीर्घकालिक कूटनीतिक रिश्तों को प्रभावित नहीं करेगा।
किन देशों पर असर
अमेरिकी कदम का प्रभाव पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, ईरान, इराक, रूस, सोमालिया, हैती और इरिट्रिया समेत कई देशों पर पड़ा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन देशों के प्रवासी अमेरिका पहुंचकर स्थानीय प्रशासनिक संसाधनों और करदाताओं से प्राप्त मदद पर निर्भर हो जाते हैं, जिसके चलते वीजा रोक को लागू किया गया
पाकिस्तान की घरेलू राजनीति पर बड़ा झटका, ट्रंप से मुलाकात अब बनी सियासी सिरदर्द
पाकिस्तान में यह कदम एक शर्मनाक स्थिति के रूप में देखा जा रहा है। हाल के महीनों में सेना प्रमुख आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका दौरे के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी और जनता के सामने मजबूत रिश्तों का दावा किया था।
इसी दौरान शहबाज शरीफ ने ट्रंप का नाम नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट करने की घोषणा भी कर दी थी। लेकिन विश्लेषकों के मुताबिक वीजा रोक के फैसले ने पाकिस्तान के उन दावों की हवा निकाल दी है और यह संदेश दिया है कि वाशिंगटन इस्लामाबाद पर भरोसे को लेकर आश्वस्त नहीं है।





