झुंझुनू: मानवता की एक अद्भुत मिसाल पेश करते हुए झुंझुनू पुलिस विभाग के कर्मियों ने भरतपुर रेंज में पदस्थापित श्री नरेश शर्मा उपनिरीक्षक के पुत्र हृदयांश (1 वर्ष 8 महीने) के इलाज में मदद की है। हृदयांश स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी नामक एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित था, जिसके इलाज के लिए 17.5 करोड़ रुपये की आवश्यकता थी।
बीमारी और इलाज
स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी एक ऐसी बीमारी है जो मांसपेशियों को कमजोर बना देती है और धीरे-धीरे जीवन के लिए खतरा बन जाती है। हृदयांश के लिए इलाज का एकमात्र विकल्प जोल्जेंसमा नामक एक जीन थेरेपी इंजेक्शन था, जिसकी कीमत 17.5 करोड़ रुपये थी।
पुलिस का सहयोग
हृदयांश के पिता नरेश शर्मा भरतपुर रेंज मे पुलिस में उपनिरीक्षक के रूप में कार्यरत हैं। जब उनके बेटे की बीमारी के बारे में पता चला तो पूरे झुंझुनू पुलिस विभाग ने उनकी मदद करने का फैसला किया।
एक दिन का वेतन
मानवता की भावना से प्रेरित होकर, झुंझुनू पुलिस के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, मंत्रालयिक कर्मचारियों और सहायक कर्मियों ने स्वेच्छा से अपने एक दिन का वेतन कटौती करवाने का फैसला किया।
इकट्ठा हुई भारी रकम
इस नेक पहल के तहत कुल ₹28,63,573 जमा किए गए, जो हृदयांश के इलाज के लिए एक बड़ी राहत बन गए।
इलाज और आगे की राह
इकट्ठा की गई राशि से हृदयांश का इलाज जयपुर के जेके लोन अस्पताल में शुरू कर दिया गया है। उसे दुनिया के सबसे महंगे इंजेक्शनों में से एक, जोल्जेंसमा भी लगाया जा चुका है।
पुलिस का संदेश
झुंझुनू पुलिस ने इस नेक कार्य के माध्यम से यह संदेश दिया है कि मानवता सबसे बड़ी शक्ति है और मुश्किल समय में एक दूसरे का सहयोग करना हम सबका कर्तव्य है।
हृदयांश के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना
झुंझुनू पुलिस के सभी कर्मचारी हृदयांश के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं और प्रार्थना करते हैं कि वह इस बीमारी से लड़कर एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सके।
यह निश्चित रूप से झुंझुनू पुलिस द्वारा की गई एक प्रेरणादायक पहल है जो मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को दर्शाती है।





