Thursday, February 12, 2026
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ज्योति कलश यात्रा का दिव्य पड़ाव: श्री मोटा महादेव मंदिर में सैकड़ों दीपों से शिवमय हुआ वातावरण

मंड्रेला: कस्बा उस समय आध्यात्मिक चेतना, आस्था और श्रद्धा के अद्भुत रंग में रंग गया, जब शांति कुंज हरिद्वार से पधारी पावन ज्योति कलश यात्रा का भव्य रथ नगर के विभिन्न वार्डों से होते हुए शेखावाटी के सबसे बड़े शिवलिंग वाले श्री मोटा महादेव मंदिर पहुँचा। 100 वर्षों से अखंड प्रज्वलित दिव्य ज्योति, तीर्थों की पावन रज और जल से युक्त इस यात्रा ने पूरे नगर को शिवमय बना दिया और यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक चेतना का भी प्रतीक बन गया।

ज्योति कलश यात्रा के मंड्रेला आगमन पर नगरवासियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। यात्रा का दिव्य रथ जैसे ही वार्डों में पहुंचा, श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलन, पुष्प अर्पण और आरती के माध्यम से स्वागत किया। अखंड ज्योति के दर्शन मात्र से ही श्रद्धालु भावविभोर नजर आए और पूरे वातावरण में भक्ति एवं अनुशासन की अनुभूति हुई।

ज्योति कलश यात्रा का विश्राम शिवाजी कॉलोनी स्थित प्राचीन श्री मोटा महादेव मंदिर में हुआ, जिसे शेखावाटी के सबसे बड़े शिवलिंग के लिए जाना जाता है। यहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशाल पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और दीप यज्ञ का आयोजन किया गया। सैकड़ों दीपों की ज्योति से मंदिर प्रांगण आलोकित हो उठा और पूरा परिसर शिवमय वातावरण में डूब गया।

गायत्री शक्ति पीठ के प्रतिनिधि रमेश तुलस्यान ने कहा कि ज्योति कलश यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज में संस्कार, नैतिकता और सद्भाव को जागृत करने का दिव्य अभियान है। अखंड ज्योति अज्ञान के अंधकार से निकलकर सेवा, सत्य और सकारात्मक जीवन मूल्यों की ओर अग्रसर होने का संदेश देती है। उन्होंने मंड्रेला के श्रद्धालुओं की सामूहिक आस्था को प्रेरणादायी बताया।

भामाशाह और सामाजिक कार्यकर्ता विनोद सिंह निर्वाण ने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक चेतना का विस्तार होता है। शेखावाटी के सबसे बड़े शिवलिंग वाले श्री मोटा महादेव मंदिर में ज्योति कलश यात्रा का विश्राम अपने आप में ऐतिहासिक क्षण है, जो यह प्रमाणित करता है कि भारतीय संस्कृति और परंपराएं आज भी जीवंत हैं।

ज्योति कलश यात्रा के दौरान महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की उल्लेखनीय सहभागिता देखने को मिली। पूरे नगर ने श्रद्धा, अनुशासन और सहभागिता का परिचय देते हुए इस आध्यात्मिक महापर्व को स्मरणीय और ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।

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