पिलानी: सनातन धर्म और संत परंपरा के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण सामने आया है। अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सनातन सम्राट स्वामी चक्रपाणि का जूना अखाड़ा के जगद्गुरु शंकराचार्य पद पर विधिवत अभिषेक किया गया। यह निर्णय जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी के निर्देश पर संपन्न हुआ।
पदग्रहण के साथ ही स्वामी चक्रपाणि का नया नाम “स्वामी चक्रपाणि नंद गिरी” घोषित किया गया। इस घोषणा के बाद संत समाज और हिन्दू संगठनों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
राजस्थान प्रदेशाध्यक्ष पवन कुमार पुनिया ने जानकारी देते हुए बताया कि यह नियुक्ति सनातन परंपरा और राष्ट्रवादी विचारधारा के लिए गौरवपूर्ण क्षण है। उन्होंने कहा कि स्वामी चक्रपाणि नंद गिरी के नेतृत्व में सनातन धर्म, हिन्दू एकता और सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा मिलेगी।
पदाभिषेक के बाद राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों से बधाइयों का तांता लगा हुआ है। लक्ष्मण राम प्रजापत, डॉ. राजेंद्र शर्मा झेरलीवाला, भागीरथ सिंह पिलानिया, अशोक कुमार योगी, विमल कुमार शर्मा और नवीन कुमार शुरा सहित अनेक पदाधिकारियों ने दूरभाष के माध्यम से शुभकामनाएं प्रेषित कीं। सभी ने इसे सनातन धर्म के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया।
अखिल भारत हिन्दू महासभा से जुड़े संतों के अनुसार, जगद्गुरु शंकराचार्य का पद सनातन वैदिक परंपरा में अत्यंत प्रतिष्ठित माना जाता है। यह दायित्व केवल आध्यात्मिक नेतृत्व ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मार्गदर्शन का भी प्रतीक है।
जूना अखाड़ा देश के प्रमुख अखाड़ों में गिना जाता है और कुंभ सहित प्रमुख धार्मिक आयोजनों में इसकी केंद्रीय भूमिका रहती है। ऐसे में स्वामी चक्रपाणि नंद गिरी की नियुक्ति को संगठनात्मक और आध्यात्मिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
स्वामी चक्रपाणि नंद गिरी के अभिषेक के बाद विभिन्न राज्यों से संत, सामाजिक संगठनों और समर्थकों द्वारा शुभकामनाएं भेजी जा रही हैं। हिन्दू महासभा के पदाधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में संगठन की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में और अधिक विस्तार देखने को मिलेगा।





