चिड़ावा: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा चिड़ावा में विजय दशमी उत्सव धूमधाम से मनाया गया। परमहंस बस्ती स्थित श्योराण गेस्ट हाउस में हुए कार्यक्रम में शस्त्र पूजन, योग प्रदर्शन और पथ संचलन का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में नन्हे स्वयंसेवकों की उपस्थिति से कार्यक्रम स्थल देशभक्ति के रंग में रंग गया।
🕉️ शौर्य और धर्म का जागरण जरूरी – प्रभुशरण तिवाड़ी
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रभुशरण तिवाड़ी ने अपने संबोधन में कहा कि “विजय दशमी हमें याद दिलाती है कि धर्म और शौर्य का जागरण समाज में हमेशा आवश्यक है। जिस प्रकार भगवान राम ने असत्य पर सत्य की विजय प्राप्त की, उसी प्रकार हमें भी भीतर की बुराइयों और सामाजिक चुनौतियों पर विजय पाना चाहिए।” उन्होंने स्वयंसेवकों से केवल शस्त्र नहीं, बल्कि चरित्रबल के पूजन का भी संकल्प लेने का आह्वान किया।
⚔️ शस्त्र और शास्त्र का समन्वय भारत की संस्कृति की पहचान – अशोक व्यास
मुख्य अतिथि अशोक व्यास ने कहा कि “भारत की संस्कृति हमेशा शस्त्र और शास्त्र दोनों के संतुलन पर आधारित रही है। शस्त्र हमें सुरक्षा का भाव देते हैं, जबकि शास्त्र हमें सही दिशा दिखाते हैं।” वहीं, क्षेत्रीय संघ चालक रमेश अग्रवाल ने कहा कि शस्त्र पूजन हमें धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहने की प्रेरणा देता है। जिला संघ चालक अनिल गुप्ता भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

💪 शारीरिक प्रदर्शन से दिखाया अनुशासन और एकता का संदेश
श्योराण गेस्ट हाउस परिसर में स्वयंसेवकों ने योग, दंड और व्यायाम के साथ शारीरिक प्रदर्शन किया, जिसने दर्शकों को अनुशासन और आत्मबल का संदेश दिया। इसके बाद पूर्ण गणवेश में स्वयंसेवकों का पथ संचलन शहर के मुख्य मार्गों से गुजरा। घोष की स्वर लहरियों और कदमताल की गूंज ने शहरवासियों का ध्यान आकर्षित किया।
🌼 सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्र भावना का प्रदर्शन
पथ संचलन के दौरान जगह-जगह नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। इस आयोजन का उद्देश्य केवल विजय दशमी मनाना नहीं, बल्कि समाज में सांस्कृतिक मूल्यों, अनुशासन और राष्ट्रनिष्ठा का संदेश फैलाना था।





