चिड़ावा: मकर संक्रांति 2026 के अवसर पर चिड़ावा कस्बे में सामाजिक सेवा की परंपरा एक बार फिर जीवंत हो उठी। कबुतर खाना बस स्टैंड पर दुकानदारों और स्थानीय भामाशाहों ने सामूहिक प्रयासों से भंडारे का आयोजन शुरू किया, जिसमें सुबह से ही स्थानीय लोग, राहगीर, मजदूर और जरूरतमंद नागरिक स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद ले रहे हैं। चिड़ावा में यह सेवा अभियान सात से आठ वर्षों से लगातार होता आ रहा है, जो समाज में एकता और सेवा भावना की मिसाल पेश करता है।
सुबह से शाम तक चल रहा भंडारा, लोग कर रहे सेवा
मकर संक्रांति पर्व की शुरुआत होते ही चिड़ावा में जनसेवा की भावना सड़कों पर उतर आई। कबुतर खाना बस स्टैंड पर आयोजित इस भंडारे में सुबह से ही कार्यकर्ता जुटे और भोजन वितरण प्रारंभ कर दिया। कस्बे से आने वाले युवा, मजदूर, छात्र, महिलाएं और राहगीर यहां से भोजन ग्रहण करते दिखाई दे रहे हैं। आयोजन देर शाम तक जारी रहेगा।
दुकानदारों और भामाशाहों की सामूहिक पहल
लगातार सात से आठ वर्षों से चिड़ावा के कई दुकानदार और भामाशाह इस आयोजन में योगदान दे रहे हैं। उनका मानना है कि सेवा और दान मकर संक्रांति पर पुण्य दायी माना जाता है। स्थानीय व्यापारियों ने अपनी आर्थिक क्षमता और सहयोग से भंडारे के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई। आयोजनकर्ता बताते हैं कि यह केवल भोजन वितरण नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला त्योहार है।

कबुतर खाना बस स्टैंड पर तैयार मेन्यू इस बार भी बेहद आकर्षक रहा। भोजन सेवा में कोप्ता, बेसन चक्की, पकौड़ी, ब्रेड पकोड़ा, मिर्ची बड़ा और जलेबी जैसे गर्मागरम व्यंजन राहगीरों और जरूरतमंदों को परोसे जा रहे हैं। भोजन प्राप्त करने वालों में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी शामिल हैं।

सामाजिक संदेश: त्योहार सिर्फ उत्सव नहीं, सेवा भी
भंडारे में शामिल स्वयंसेवकों ने बताया कि मकर संक्रांति केवल पर्व नहीं, बल्कि समाज के उन लोगों तक खुशी पहुंचाने का अवसर है जो जरूरत के दौर से गुजर रहे हैं। कई युवाओं ने भी योगदान दिया और प्लेट परोसने, पकवान बांटने और भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाई।
ऐसे आयोजन सामाजिक सद्भाव बढ़ाते हैं और त्योहारों का असली संदेश सामने लाते हैं।





