चिड़ावा: उप जिला अस्पताल इन दिनों सुर्खियों में है, लेकिन इलाज या सुविधाओं के कारण नहीं, बल्कि लगातार बढ़ते विवादों, डॉक्टर–कर्मचारियों के हंगामों, पत्रकारों के साथ मारपीट और बाहरी जांच-दवाइयों के आरोपों की वजह से। शहर का यह मुख्य सरकारी अस्पताल अब चिकित्सा सेवा से ज्यादा राजनीति, टकराव और कार्य बहिष्कार की खबरों के कारण चर्चा में है।
अस्पताल में रोज नया विवाद, शहर में बढ़ी नाराज़गी
चिड़ावा का उप जिला अस्पताल इन दिनों राजनीति और विवादों का केंद्र बनता जा रहा है। शहर में चर्चा है कि अस्पताल के डॉक्टर और चिकित्सा कर्मी अक्सर किसी न किसी बहस, हंगामे या लड़ाई की वजह से चर्चा में रहते हैं। कभी आपस में टकराव, कभी मरीजों से कहासुनी और कई बार पत्रकारों से उलझने की घटनाएं सामने आई हैं।
जनता का आरोप—अच्छे इलाज के नाम पर दूसरे अस्पताल भेजा जाता है
मरीजों और परिवारों का कहना है कि अस्पताल में इलाज की बजाय उन्हें दूसरे निजी अस्पतालों का रास्ता दिखाया जाता है। कई लोग बताते हैं कि जांच करवाने के लिए उन्हें बाहर की लैब में भेजा जाता है और दवाइयां भी बाहर से खरीदने का दबाव बनाया जाता है। लोगों का आरोप है कि बार–बार शिकायत करने के बावजूद अस्पताल प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता।
अस्पताल कर्मचारियों का समय इलाज से ज्यादा शिकायतों व हंगामे में गुजरता है
स्थानीय लोगों के अनुसार, अस्पताल के कर्मचारी अस्पताल में कम और एसडीएम कार्यालय, पंचायत समिति व पुलिस थाने में ज्यादा दिखाई देते हैं। राजकार्य में बाधा जैसे प्रावधानों का सहारा लेकर विरोध करने वालों को एफआईआर की धमकी दी जाती है। इस वजह से आम नागरिक अपनी शिकायत दर्ज कराने में भी हिचकिचाने लगे हैं।
पत्रकारों को कमरे में बंद कर मारपीट का आरोप, बढ़ा तनाव
हाल ही में यूट्यूब चैनलों से जुड़े पत्रकारों ने गंभीर आरोप लगाए कि उन्हें अस्पताल परिसर से घसीट कर अंदर ले जाकर कमरे में बंद किया गया और मारपीट की गई। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने कार्य बहिष्कार का दबाव बनाकर उन्हीं पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की मांग की। इस घटना के बाद स्थानीय मीडिया संगठनों में आक्रोश है।
नो मीडिया जोन घोषित, चहेतों को सीएमओ केबिन तक पहुंच
पत्रकारों से विवाद के बाद अस्पताल प्रशासन द्वारा अस्पताल परिसर को नो मीडिया जोन घोषित कर दिया गया, अस्पताल की बिल्डिंग के बाहर एक टीन शेड को मीडिया जोन बना दिया गया, जबकि अपने चहेते पत्रकारों व यूट्यूबर्स को परिसर में कहीं भी आने जाने व वीडियो बनाने की खुली छूट दी जा रही है।
एंबुलेंस कर्मियों को कमरे से बाहर निकाला, ताला लगाया
108 और 104 एंबुलेंस कर्मियों ने बताया कि अस्पताल परिसर में उन्हें जो कमरा दिया गया था, उसे अचानक ताला लगाकर खाली करवा दिया गया। इससे एंबुलेंस सेवाओं पर भी असर पड़ा है और एंबुलेंस कर्मियों के भी त्वरित रिस्पांस में कमी आने की संभावना जताई जा रही है।
बीसीएमओ के खिलाफ धरना, पैदल मार्च और शिकायतें
बीते दिनों बीसीएमओ के खिलाफ कर्मचारियों ने धरना–प्रदर्शन किया। कई बार पैदल मार्च करते हुए उपखंड कार्यालय व पुलिस थाने पहुंचकर शिकायतें दर्ज कराई गईं। लगातार बढ़ते विवादों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शहर की जनता अब इस आस में टकटकी लगाए बैठी है कि राजनैतिक वरदहस्त प्राप्त ये कर्मचारी अपनी कार्यशैली में बदलाव लाएंगे या उच्च स्तरीय कार्यवाही से जनता को राहत मिलेगी। फिलहाल उप जिला अस्पताल की हालत राम भरोसे हैं।





