Sunday, March 29, 2026
Homeविदेशकैंसर के खिलाफ रूस ने वैक्सीन का किया एलान, वैक्सीन से पूरी...

कैंसर के खिलाफ रूस ने वैक्सीन का किया एलान, वैक्सीन से पूरी दुनिया को उम्मीद, मानवीय आधार पर सभी देशों को देने का वादा, अमेरिका-यूरोप की फार्मा कंपनियां बेचैन

रूस: अब कैंसर को लेकर डर का माहौल बदलने वाला है। रूस ने इस जानलेवा बीमारी के लिए एक नई वैक्सीन विकसित कर ली है, जो न केवल बीमारी को कंट्रोल करेगी, बल्कि इससे बचाव भी कर सकेगी। यह वैक्सीन अब मानव परीक्षण के चरण में पहुंच चुकी है और अगले कुछ महीनों में मॉस्को के दो बड़े कैंसर संस्थानों—हर्टसन रिसर्च इंस्टीट्यूट और ब्लोखिन कैंसर सेंटर में इसका परीक्षण शुरू किया जाएगा। वैक्सीन का निर्माण गामालेया रिसर्च इंस्टीट्यूट करेगा, जिसने पहले कोविड-19 की स्पुतनिक V वैक्सीन बनाई थी।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने घोषणा की है कि यह वैक्सीन पूरी दुनिया को मानवीय आधार पर उपलब्ध करवाई जाएगी और शुरुआत में यह मुफ्त होगी। वैक्सीन की सबसे खास बात यह है कि यह पर्सनलाइज्ड होगी, यानी हर व्यक्ति के लिए विशेष रूप से तैयार की जाएगी, और किसी दूसरे को नहीं दी जा सकेगी।

इस वैक्सीन की खबर आने के बाद पश्चिमी देशों की बड़ी दवा कंपनियों में बेचैनी देखी जा रही है। अमेरिका और यूरोप की कंपनियां कैंसर की दवाइयों और थेरेपी पर अरबों डॉलर का कारोबार करती हैं। 2022 में कैंसर से जुड़ी दवाइयों का वैश्विक बाजार लगभग 203 अरब डॉलर का था, जो 2028 तक 400 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इनमें 60 से 65 फीसदी बाजार अमेरिका और यूरोप की कंपनियों के कब्जे में है। अकेले अमेरिका की कंपनियों की हिस्सेदारी 45 से 50 फीसदी के बीच है।

उदाहरण के तौर पर मर्क कंपनी की कैंसर दवा Keytruda की बिक्री वर्ष 2023 में 25 अरब डॉलर रही, जो कंपनी की कुल कमाई का 40 प्रतिशत थी। यह दवा कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी महंगी प्रक्रियाओं के साथ दी जाती है, जिसकी एक खुराक की कीमत 10,000 डॉलर यानी करीब 8.5 से 9 लाख रुपये तक होती है। अगर एक बार की वैक्सीन से कैंसर का स्थायी इलाज संभव हो जाए, तो यह लंबी अवधि के इलाज और महंगी दवाओं की मांग को खत्म कर सकता है।

इसी कारण सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई है कि पश्चिमी कंपनियां इस रूसी वैक्सीन को लेकर चिंतित हैं। आलोचकों का कहना है कि अमेरिका और यूरोप की फार्मा कंपनियां अपनी दवाओं के पेटेंट के जरिए बाजार पर एकाधिकार बनाए रखती हैं और वैकल्पिक या सस्ते इलाज को दबाने का प्रयास करती हैं। उनका तर्क है कि अगर एक बार की वैक्सीन से स्थायी इलाज संभव हो गया, तो यह पूरा आर्थिक मॉडल ढह सकता है।

हालांकि, इस तर्क के जवाब में यह भी कहा जा रहा है कि फार्मा कंपनियां हर साल रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर अरबों डॉलर खर्च करती हैं। वर्ष 2023 में दुनियाभर में फार्मा रिसर्च पर कुल खर्च 250 अरब डॉलर से अधिक रहा, जिसमें कैंसर संबंधी शोध पर सबसे अधिक खर्च हुआ। ऐसे में यह कहना गलत होगा कि कंपनियां इलाज रोक रही हैं। वर्ष 2020 से 2023 के बीच अमेरिका की FDA ने 50 से अधिक नई कैंसर दवाओं को मंजूरी दी है।

कुछ लोग यह भी आरोप लगाते हैं कि पहले भी कई बार वैकल्पिक इलाज के रास्ते बंद किए गए हैं, लेकिन इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि कंपनियां जानबूझ कर कैंसर का इलाज रोक रही हैं। इस पूरे मुद्दे पर अंतिम निष्कर्ष तब ही निकल पाएगा जब रूस अपने वैक्सीन परीक्षण के डेटा सार्वजनिक करेगा। फिलहाल पूरी दुनिया इस वैक्सीन को लेकर उम्मीद लगाए बैठी है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या रूस इस घातक बीमारी के खिलाफ निर्णायक हथियार पेश कर पाएगा।

- Advertisement -
समाचार झुन्झुनू 24 के व्हाट्सअप चैनल से जुड़ने के लिए नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करें
- Advertisemen's -

Advertisement's

spot_img
Slide
previous arrow
next arrow
Shadow
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

- Advertisment -

Recent Comments

error: Content is protected !!