उदयपुरवाटी: क्षेत्र में अवैध खनन के विरोध में जनता फट पड़ी। केड़ में प्रभारी मंत्री अविनाश गहलोत की जनसुनवाई हंगामेदार रही, जहां जयन्त मूंड की अगुवाई में पहुंचे ग्रामीणों ने खनन अधिकारी और तहसीलदार पर लीज से अधिक क्षेत्र में खनन कराने, गौचर जमीन कब्जाने और खनन माफियाओं को संरक्षण देने तक के आरोप जड़ दिए गए। मंत्री ने सख्त चेतावनी देते हुए 7 दिन में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।
गुढागौड़जी में 15 दिनों से आंदोलन, पहाड़ कांप रहे — घरों में दरारें
गुढागौड़जी ग्राम पंचायत के निवासी पिछले पंद्रह दिनों से पहाड़ियों पर अवैध खनन के खिलाफ धरना दे रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि लगातार ब्लास्टिंग के कारण सैकड़ों घरों में चौड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। गांव के रतनलाल, चेतराम और जगदीश ने जनसुनवाई में बताया कि रात्रि में अवैध खनन चलने से घर कांप जाते हैं और लोग भय के साये में जी रहे हैं।
कुएं सूखे, मोटरें जमीन में धंसी — पानी खत्म होने की चेतावनी
दर्जनों ग्रामीणों ने कहा कि पहाड़ियों में दरारों से पानी का प्राकृतिक प्रवाह रुक गया है। धरना दे रहे बुजुर्गों ने दावा किया कि गांव के कई कुओं में पानी सूख गया और कई मोटरें जमीन में धंस गईं। किसानों का कहना है कि अवैध ब्लास्टिंग ने भूजल स्रोत बर्बाद कर दिए, जिससे खेती संकट में है।
अवैध खनन, लीज सीमा से बाहर खुदाई और गौचर भूमि पर कब्जे का आरोप
जनसुनवाई में जयन्त मूण्ड और उनके साथ पहुंचे ग्रामीणों ने कहा कि खनन माफिया आवंटित लीज से बाहर जाकर खुदाई कर रहे हैं। कार्रवाई न होने के कारण चारागाह और गौचर धरती भी खोखली हो रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खनन अधिकारी और तहसीलदार की मिलीभगत से रेत, बजरी और पत्थर का अवैध खेल चल रहा है।
एनजीटी नियमों की उड़ रही धज्जियां — कार्रवाई कागजों में फंसी
ग्रामीणों और युवाओं ने कहा कि अवैध खनन के मामले में एनजीटी के स्पष्ट आदेश हैं, लेकिन राजस्व और खनन विभाग ने सुनवाई नहीं की। कई शिकायतें देने के बावजूद फाइलें अटकी रहीं। स्थानीयों का आरोप है कि प्रशासन शिकायत दर्ज करता है, लेकिन कार्रवाई फाइलों से आगे बढ़ती ही नहीं।
अविनाश गहलोत की कड़ी फटकार — ‘ठंड में ग्रामीण धरना देते, और आप मलाई खा रहे हो’
प्रभारी मंत्री अविनाश गहलोत मंच पर शिकायत सुनते ही भड़क उठे। उन्होंने खनन विभाग के अधिकारियों से पूछा कि गांव में आंदोलन चल रहा है, घरों में दरारें हैं और आप लोग गंभीर नहीं हैं। गहलोत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ग्रामीण बीच सड़क में ठंड में डटे हैं और विभाग सो रहा है। उन्होंने 7 दिन में रिपोर्ट नहीं आने पर स्वयं कार्रवाई करने की चेतावनी दी।
कलेक्टर का बयान — ‘कमेटी बनी थी, कार्रवाई क्यों नहीं हुई पता नहीं’
जनसुनवाई में जिला कलेक्टर ने माना कि प्रशासन ने कमेटी गठित की थी, लेकिन कार्रवाई क्यों नहीं हुई, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से फौरन स्पष्टीकरण मांगा और कहा कि अब हर स्तर पर जांच होगी।
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