Thursday, March 12, 2026
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अदालत ने ईडी से मांगा जवाब: सोनिया-राहुल के खिलाफ आरोपपत्र पर उठे सवाल

नई दिल्ली: नेशनल हेराल्ड से जुड़े बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर आरोपपत्र पर सुनवाई के दौरान राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत में अहम बहस हुई। सुनवाई में ईडी ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग के लिए “अनुसूचित अपराध” एक ट्रिगर है, लेकिन जरूरी नहीं कि किसी कंपनी की हर गतिविधि मनी लॉन्ड्रिंग हो।

अदालत के तीखे सवाल: क्या ये शेयर अपराध की आय हैं?

अदालत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट शब्दों में ईडी से सवाल किया—

“क्या यंग इंडियन को मिले शेयर वास्तव में अनुसूचित अपराधों से उत्पन्न हैं? क्या मनी लॉन्ड्रिंग की दृष्टि से शेयर, संपत्ति और किराया अपराध की आय माने जाएंगे?”

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न्यायालय ने यह भी कहा कि ईडी को यह सिद्ध करना होगा कि किन संपत्तियों को अपराध की आय माना जा सकता है। यह बात उस समय उठी जब ईडी ने कहा कि यंग इंडियन की कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं थी और वह केवल आरोपितों के हित के लिए कार्य कर रही थी।

ईडी का पक्ष: यंग इंडियन ने धोखाधड़ी से प्राप्त की संपत्ति

ईडी के अनुसार, यंग इंडियन को एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) के जो शेयर मिले, वह अपराध की आय से संबंधित हैं और इस प्रक्रिया को धोखाधड़ी करार दिया गया। ईडी ने दावा किया कि:

  • शेयर, संपत्ति और किराया — ये सभी अपराध की आय हैं।
  • यंग इंडियन की कोई स्वतंत्र आर्थिक गतिविधि नहीं थी।
  • विज्ञापन और ऋण को अपराध की आय की श्रेणी से बाहर रखा गया है।

क्या है मामला?

15 अप्रैल 2025 को ईडी ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। आरोप है कि उन्होंने यंग इंडियन के जरिए एजेएल के शेयर धोखाधड़ी से हासिल किए, जो कि नेशनल हेराल्ड अखबार की प्रकाशक कंपनी थी।

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फोरेंसिक ऑडिट पर भी सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने ईडी से पूछा कि क्या उनके पास फोरेंसिक ऑडिटर है? न्यायालय ने कहा कि कंपनियों के कामकाज की प्रक्रिया और शेयर जारी करने के मान्य तरीके समझना आवश्यक है।

“एक बार शेयर जारी हो जाते हैं तो वह संपत्ति बन जाती है। फिर यह देखना जरूरी है कि क्या उस संपत्ति का स्रोत अपराध से जुड़ा है?”

ईडी ने उत्तर में दोहराया कि यह सारी संपत्ति अपराध की आय से संबंधित है।

निरंतर सुनवाई के आदेश

प्रतिवादी पक्ष ने कोर्ट से रिकॉर्ड की समीक्षा के लिए सुनवाई टालने की मांग की, लेकिन ईडी ने इसका विरोध किया। इसके पश्चात अदालत ने आदेश दिया कि अब इस मामले की सुनवाई 2 जुलाई से 8 जुलाई तक प्रतिदिन की जाएगी, जिसमें ईडी व अन्य पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी।

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