Monday, December 15, 2025
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होंगें दिव्य दर्शन! बालोतरा धाम के संत नारायण भारती 15 नवंबर को चिड़ावा आ रहे, चार दिन भक्तों को मिलेगा आशीर्वाद

चिड़ावा (झुंझुनू): आध्यात्मिक जगत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। बालोतरा धाम के पूज्य पीठाधीश्वर संत नारायण भारती 15 नवंबर को चिड़ावा आ रहे हैं। संत के चार दिन के इस चिड़ावा प्रवास को लेकर क्षेत्र के श्रद्धालु और शिष्यों में भारी उत्साह है। यह आगमन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह चिड़ावा क्षेत्र में एक नई आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करेगा। संत भारती के शिष्य अनिल जोशी ने भक्तों से अपील की है कि वे संत के एकांत ध्यान-तप के समय का सम्मान करते हुए केवल निर्धारित समय पर ही दर्शन के लिए पधारें।

पूज्य संत के स्वागत और नगर भ्रमण का विस्तृत कार्यक्रम

संत नारायण भारती का आगमन शनिवार 15 नवंबर को होगा। सबसे पहले भगवान परशुराम मार्ग पर स्थित ब्रह्म चैतन्य संस्थान के परशुराम भवन चिड़ावा में उनका भव्य स्वागत किया जाएगा।

अगले दिन, 16 नवंबर को, संत का चिड़ावा देवस्थान नगर भ्रमण का कार्यक्रम रखा गया है। इस दौरान वे नगर के प्रमुख देवस्थानों के दर्शन करेंगे, जिससे स्थानीय लोगों को उनके करीब आने का अवसर मिलेगा।

श्रद्धालुओं के लिए दर्शन और विशेष प्रवचन का समय

संत नारायण भारती भक्तों, शिष्यों से मुलाकात करेंगे और उन्हें आशीर्वाद देंगे। यह आशीर्वाद और दर्शन कार्यक्रम 16 और 17 नवंबर को दोपहर चार बजे से शाम छह बजे तक रखा गया है। यह समय उन भक्तों के लिए निर्धारित किया गया है जो संत के आशीर्वचन प्राप्त करना चाहते हैं।

17 नवंबर की शाम को एक विशेष प्रवचन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरान संत आध्यात्मिक ज्ञान की वर्षा करेंगे और भक्तों को प्रसाद वितरण भी होगा। यह आयोजन सभी भक्तों के लिए संत दर्शन और धर्म लाभ का एक सुनहरा अवसर है।

प्रस्थान और एकांत ध्यान-तप की अपील

चार दिवसीय प्रवास के बाद संत 18 नवंबर को सुबह ध्यान और आशीर्वचन के उपरांत चिड़ावा से बालोतरा स्थित अपने आश्रम वरियाभगजी, ढाणा के लिए प्रस्थान करेंगे।

संत भारती के कार्यक्रम के व्यवस्थापक अनिल जोशी ने श्रद्धालुओं और उनके शिष्यों से अनुरोध किया है कि संत चिड़ावा प्रवास के दौरान प्रतिदिन सुबह और शाम को ध्यान तप की एकांत अवस्था में रहेंगे और इस अवधि में वे किसी से नहीं मिलेंगे। इसलिए सभी से निवेदन है कि वे दर्शन के समय का ध्यान रखते हुए ही संत के दर्शन के लिए पधारें। संत के प्रवास के दौरान दो-तीन निजी कार्यक्रम भी हैं जिनमें वे शामिल होंगे।

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