सूरजगढ़: कस्बे में डिवाइडर सौंदर्यीकरण का अधूरा और बेहद लापरवाही भरा काम लोगों की जान के लिए खतरा बन गया है। पिछले 10 दिनों में 8 सड़क हादसों ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रात के समय बिना संकेतक के बीच सड़क पर पड़ा निर्माण मलबा, कंक्रीट, ड्रम और मशीनरी वाहन चालकों के लिए मौत का जाल बनते जा रहे हैं।
धरडू चौराहे से लोटिया मोड़ (बुहाना रोड) तक डिवाइडर सौंदर्यीकरण का कार्य चल रहा है, लेकिन रात होते ही लक्की इंडस्ट्रीज जयपुर के वर्कर बीच सड़क पर ही क्रेशर मटेरियल, मिट्टी, पानी के ड्रम और उपकरण छोड़ देते हैं। इससे सड़क का आधा हिस्सा जाम हो जाता है और वाहन चालकों को जोखिम भरे मोड़ से गुजरना पड़ता है।
वाहनों की आवाजाही के कारण सड़क पर फैली मिट्टी धूल का रूप ले लेती है, जिससे व्यापारियों और आम नागरिकों को सांस लेने तक में परेशानी होती है।
लगातार हो रहे हादसों की ताज़ा मिसाल गुरुवार रात सामने आई, जब करीब 8:30 बजे सूरजगढ़ फाटक पार करते ही सूरजगढ़ एकेडमी स्कूल के आगे 108 एम्बुलेंस और एचआर नंबर की एक कार निर्माण सामग्री से टकराकर क्षतिग्रस्त हो गई। नर्सिंग कर्मी आनंद सिंह ने बताया कि एंबुलेंस बुहाना से झुंझुनूं रेफर मरीज़ को छोड़कर वापस बुहाना जा रही थी अचानक रोड़ पर सामने क्रेशर गिट्टी आ जाने से 108 एंबुलेंस उससे टकरा गई। इसके कुछ देर बाद ही एक एचआर नंबर की कार भी वहीं दुर्घटना ग्रस्त हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सड़क पर रखा मलबा और ड्रम अचानक सामने आने से वाहन चालकों के पास बचने का कोई मौका नहीं बचता।
इस सड़क पर निजी शिक्षण संस्थान, बैंक, ई-मित्र केंद्र और बाजार क्षेत्र होने के कारण दिनभर भारी यातायात रहता है। इसके बावजूद डिवाइडर पर इंटरलॉक लगाने वाली कंपनी लक्की इंडस्ट्रीज ने कोई संकेतक, चेतावनी बोर्ड या बैरिकेडिंग नहीं लगाई, जो कि निर्माण कार्य के दौरान अनिवार्य होती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह लापरवाही किसी भी दिन बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
नगरपालिका के जेईएन शुभम सैनी ने बताया कि डिवाइडर पर इंटरलॉक लगाने का काम लक्की इंडस्ट्रीज को सौंपा गया है, जो पिछले लगभग 20 दिनों से कार्य कर रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि वर्करों द्वारा सड़क पर सामग्री छोड़ने और संकेतक न लगाने की शिकायतें मिली थीं।
शुभम सैनी ने बताया कि मौके पर जाकर ठेकेदार को पाबंद किया गया है और पहले ही उन्हें चेतावनी संकेतक, लाइट और सुरक्षा बोर्ड लगाने के लिए लिखित निर्देश दिए गए थे।
लगातार हादसे होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन और ठेकेदार दोनों की यह उदासीनता सड़क सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।




