पिलानी: आज सामने आई यह खबर सनातन धर्म और सामाजिक समरसता की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। अखिल भारत हिन्दू महासभा ने किन्नर समाज की भूमिका को संगठनात्मक रूप से सशक्त करते हुए किन्नर कांता बुआ को हिन्दू किन्नर महासभा विंग का राजस्थान प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। यह निर्णय न केवल किन्नर शक्ति को पहचान देने वाला है, बल्कि सनातन विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक मजबूत प्रयास भी है।
अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि महाराज का मानना है कि किन्नर शक्ति का योगदान किसी भी क्षेत्र में नकारा नहीं जा सकता। इसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए संगठन ने किन्नर समाज को एक मजबूत मंच देने का निर्णय लिया है। महासभा के अनुसार, किन्नर समाज की सक्रिय भागीदारी से सनातन धर्म और अधिक सशक्त होगा।
राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष पवन कुमार पुनिया, प्रदेश महामंत्री भागीरथ पिलानियां और कोर कमेटी अध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला की संयुक्त अनुशंसा पर किन्नर कांता बुआ को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। संगठन ने स्पष्ट किया कि कांता बुआ की सनातन धर्म के प्रति निष्ठा, सामाजिक सक्रियता और समर्पण को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
महासभा को उम्मीद है कि किन्नर कांता बुआ राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि महाराज के सनातन धर्म से जुड़े विचारों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने में प्रभावी भूमिका निभाएंगी। विशेष रूप से किन्नर समाज को संगठन से जोड़कर वैचारिक रूप से मजबूत करने की दिशा में यह नियुक्ति अहम मानी जा रही है।
अपने मनोनयन पर प्रतिक्रिया देते हुए किन्नर कांता बुआ ने कहा कि उनकी प्राथमिकता किन्नर शक्ति को संगठित कर समाज को आगे बढ़ाने की रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जब किन्नर समाज संगठित होकर सनातन धर्म के साथ चलेगा, तब यह विचारधारा और अधिक सशक्त होगी। कांता बुआ ने पवन कुमार पुनिया, भागीरथ पिलानियां और राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस नियुक्ति के बाद किन्नर कांता बुआ के निवास पर और किन्नर समाज में उत्साह का माहौल देखा गया। उन्हें बधाई देने वालों में नवीन कुमार सुरा, सुनील कुमार पुनिया, सुभाष चंद्र योगी, मनोज कुमार बराला, कुलदीप सिंह शेखावत, श्रीकांत यादव, अनिल कौशिक, शिव कुमार काकोडा, अशोक प्रजापति, राजू शर्मा, सुनील कुमार, रविन्द्र कुमार और सीता राम योगी सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और संगठन पदाधिकारी शामिल रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नियुक्ति केवल संगठनात्मक निर्णय नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और समावेशन की दिशा में एक मजबूत संदेश है। किन्नर समाज को धार्मिक और सामाजिक मंच पर प्रतिनिधित्व मिलने से समाज में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद की जा रही है।





