Wednesday, February 18, 2026
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व्हाट्सऐप-मेेटा को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार, CJI बोले— संविधान नहीं मान सकते तो भारत छोड़ दीजिए

नई दिल्ली: व्हाट्सऐप की 2021 प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई ने डिजिटल प्राइवेसी पर बड़ी बहस छेड़ दी है। अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप और उसकी पैरेंट कंपनी मेटा को सख्त लहजे में चेताया कि भारत में काम करने के लिए संविधान और नागरिकों की निजता का सम्मान अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट व्हाट्सऐप प्राइवेसी केस अब Google Discover और सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है।

व्हाट्सऐप की 2021 प्राइवेसी पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में व्हाट्सऐप की 2021 प्राइवेसी पॉलिसी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि यह पॉलिसी शोषणकारी है क्योंकि इसमें यूजर्स का डेटा न केवल साझा किया जाता है बल्कि व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।

CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी— भारत छोड़ दीजिए

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि यदि कोई कंपनी भारत के संविधान का पालन नहीं कर सकती तो उसे यहां काम करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत किसी भी नागरिक की प्राइवेसी से समझौता नहीं होने देगी और यूजर्स की निजता सर्वोपरि है।

‘पॉलिसी गुमराह करने वाली है’— CJI की टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने व्हाट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी को बेहद चालाकी से तैयार किया गया दस्तावेज बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एक गरीब बुजुर्ग महिला, सड़क किनारे सामान बेचने वाला व्यक्ति या केवल तमिल भाषा बोलने वाली महिला इस पॉलिसी की मंशा समझ पाएगी। अदालत ने कहा कि जब पढ़े-लिखे लोगों को भी पॉलिसी समझने में दिक्कत होती है तो ग्रामीण भारत के लोग कैसे समझेंगे।

‘बिहार का आदमी कैसे समझेगा?’— कोर्ट की चिंता

CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि व्हाट्सऐप यहां सेवा देने के लिए है, न कि डेटा इकट्ठा कर उसे साझा करने के लिए। उन्होंने कहा कि यूजर्स की सूचित सहमति और निजता से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

डेटा और विज्ञापन पर अदालत की गंभीर चिंता

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने व्यक्तिगत उदाहरण देते हुए कहा कि डॉक्टर व्हाट्सऐप पर तीन दवाइयों के नाम भेजते हैं और कुछ ही मिनटों में उन्हीं दवाओं से जुड़े विज्ञापन दिखाई देने लगते हैं। इस पर अदालत ने सवाल उठाया कि यूजर्स के व्यवहारिक डेटा का इस्तेमाल किस हद तक किया जा रहा है।

जस्टिस जॉयमाल्या बागची की टिप्पणी

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि DPDP Act भले ही प्राइवेसी की बात करता हो, लेकिन अदालत यूजर्स की बिहेवियरल टेंडेंसीज को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है। उन्होंने कहा कि डिजिटल फुटप्रिंट का इस्तेमाल ऑनलाइन विज्ञापन के लिए किया जा रहा है और ऐसी कंपनियों पर वैश्विक स्तर पर सख्त निगरानी की जरूरत है।

व्हाट्सऐप का पक्ष और कोर्ट का आदेश

व्हाट्सऐप के वकील ने अदालत को बताया कि कंपनी ने अपनी प्राइवेसी पॉलिसी को अन्य देशों के अनुरूप बना लिया है। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए मामले को तीन-जजों की बेंच के समक्ष भेजने का आदेश दिया।

₹213 करोड़ जुर्माना और कानूनी लड़ाई की पृष्ठभूमि

यह मामला तब और गंभीर हो गया जब CCI ने नवंबर 2024 में व्हाट्सऐप पर प्रतिस्पर्धा कानून के उल्लंघन के आरोप में ₹213 करोड़ का जुर्माना लगाया। आरोप था कि कंपनी ने अपनी डॉमिनेंट पोजीशन का दुरुपयोग करते हुए यूजर्स को नई पॉलिसी स्वीकार करने के लिए मजबूर किया। जनवरी 2025 में NCLAT ने डॉमिनेंस दुरुपयोग वाला निष्कर्ष हटाया, लेकिन जुर्माना बरकरार रखा। इसी विरोधाभास को चुनौती देते हुए मेटा सुप्रीम कोर्ट पहुंची है।

अगली सुनवाई 9 फरवरी को

सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर हलफनामा दाखिल करने का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी को निर्धारित की गई है।

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