नरहड़: राजस्थान की ऐतिहासिक सूफी दरगाह नरहड़ में मानवता और सेवा की मिसाल पेश करते हुए नरहड़ दरगाह सेवा फाउंडेशन ने कड़ाके की सर्दी के बीच जरूरतमंदों के लिए बड़ा राहत अभियान चलाया। सूफी संत हजरत हाजिब शकरबार शाह दरगाह परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान 500 से अधिक असहाय लोगों को कंबल वितरित किए गए, वहीं निराश्रित बच्चों को सर्दी से बचाव के लिए गर्म जैकेट भी प्रदान की गईं। इसी अवसर पर 757वें सालाना उर्स के पोस्टर का भी विधिवत विमोचन किया गया।
बढ़ती ठंड को देखते हुए नरहड़ दरगाह सेवा फाउंडेशन की ओर से यह सेवा अभियान आयोजित किया गया, जिसमें दिव्यांग, वृद्ध, असहाय, रैन बसेरों, झुग्गी बस्तियों और फुटपाथ पर जीवन यापन करने वाले लोगों को दरगाह परिसर में आमंत्रित कर कंबल वितरित किए गए। कार्यक्रम के दौरान निराश्रित बच्चों को गर्म जैकेट देकर उन्हें सर्द मौसम से बचाने का प्रयास किया गया।
फाउंडेशन की ओर से बताया गया कि जरूरतमंदों को सर्दियों में कंबल वितरण की यह परंपरा वर्षों से लगातार जारी है। इस वर्ष भी क्षेत्र में बढ़ती ठंड को ध्यान में रखते हुए सेवा कार्य को प्राथमिकता दी गई। दरगाह परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लाभार्थी पहुंचे और फाउंडेशन के इस प्रयास की सराहना की।
इस सेवा कार्य के दौरान दरगाह के वरिष्ठ खादिम हाजी अजीज पठान की उपस्थिति रही। वहीं फाउंडेशन निदेशक शाहिद पठान और शमीम पठान ने आयोजन की व्यवस्थाएं संभालीं। कार्यक्रम को सफल बनाने में करीम पीरजी, रफिक पीरजी, मुन्ना जयपुरी, अरबाज पठान, पियूष चतुर्वेदी, मैनेजर सिराज अली, कल्लु पीरजी, राकेश और ताराचंद ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

दरगाह खादिम और फाउंडेशन निदेशक शाहिद पठान ने जानकारी देते हुए बताया कि आने वाले दिनों में नरहड़ दरगाह के आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी जरूरतमंदों के लिए कंबल वितरण अभियान चलाया जाएगा, ताकि ठंड से कोई भी वंचित न रहे।
सेवा कार्यक्रम के साथ-साथ सूफी संत हजरत हाजिब शकरबार शाह के 757वें सालाना उर्स के पोस्टर का विमोचन भी किया गया। यह उर्स 15 से 17 जनवरी तक आयोजित होगा। राजस्थान की दूसरी सबसे बड़ी दरगाह मानी जाने वाली नरहड़ दरगाह में उर्स की शुरुआत बुलंद दरवाजे पर झंडा पेश करने की रस्म से होगी।
शाहिद पठान ने बताया कि 15 जनवरी को झंडे की रस्म, कुरानख्वानी और फातेहा अदा की जाएगी, जबकि रात में दरगाह परिसर में सुफियाना कलाम पेश किए जाएंगे, जो तीन दिनों तक चलेंगे। 16 जनवरी को मजार शरीफ हजरत हाजिब शकरबार बाबा की रस्म गुस्ल अदा होगी और असर की नमाज के बाद कुल के छिंटों की रस्म होगी, जिसमें जायरीन पर बाबा के पानी के छिंटे लगाए जाएंगे। 17 जनवरी को धरसू वाले बाबा के यहां सुबह 11 बजे फातेहा और कुल के छिंटों के साथ उर्स का समापन होगा।
नरहड़ दरगाह सेवा फाउंडेशन की ओर से 16 जनवरी को जायरीनों के लिए लंगर-भंडारे की विशेष व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही दरगाह परिसर को फूलों से भव्य रूप से सजाया जाएगा, ताकि देश के कोने-कोने से आने वाले अकीदतमंदों को आध्यात्मिक और सुविधाजनक वातावरण मिल सके।





