झुंझुनूं: भारत मुक्ति मोर्चा और उससे जुड़े संगठनों ने उड़ीसा के कटक में बामसेफ राष्ट्रीय अधिवेशन रद्द किए जाने के विरोध में जिला कलक्ट्रेट पर शांतिपूर्ण धरना दिया। आंदोलन आरएसएस व बीजेपी पर राजनीतिक दबाव डालने के आरोपों के साथ संविधान बचाने, ओबीसी जाति आधारित जनगणना, और ईवीएम बंद करने की मांगों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ किया गया।
झुंझुनूं जिला मुख्यालय पर ओमप्रकाश सेवदा के नेतृत्व में भारत मुक्ति मोर्चा, बहुजन क्रांति मोर्चा, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, क्षत्रीय मूलनिवासी महासंघ और राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया। प्रदर्शन के बाद जिला कलक्टर अरुण गर्ग को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए राष्ट्रीय स्तर पर उभरे विरोध को आगे बढ़ाया गया।
सेवदा ने आरोप लगाया कि उड़ीसा कटक में तय राष्ट्रीय अधिवेशन को मंजूरी मिलने के बाद भी राज्य सरकार ने आरएसएस और बीजेपी के दबाव में रद्द किया। इसे लोकतांत्रिक अधिकारों में सीधी दखल बताते हुए 725 जिलों में एक साथ विरोध प्रदर्शन का एलान किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि इस चरणबद्ध राष्ट्रीय आंदोलन के माध्यम से प्रमुख मांगों को उठाया गया, जिनमें शामिल हैं:
उड़ीसा सरकार द्वारा बामसेफ और भारत मुक्ति मोर्चा के अधिवेशन की परमिशन तुरंत बहाल की जाए
डेलिगेट्स व आयोजकों के खर्च व नुकसान की पूरी भरपाई की जाए
राजनीतिक दबाव में किसी भी वैचारिक-सामाजिक कार्यक्रम को रोकने की परंपरा खत्म की जाए
संविधान संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए अलग कानून बनाया जाए
ओबीसी जाति आधारित जनगणना अविलंब कराई जाए
ईवीएम बंद कर बैलेट पेपर लागू किए जाएं
अनुच्छेद 356 के तहत राज्य व केंद्र सरकार की बर्खास्तगी पर विचार हो
धरने में चौथमल सोकरिया, आयुष्मति किरण, एडवोकेट धर्मपाल बंसीवाल, रामसिंह जोधा, कैप्टन सोहनलाल, रतनलाल तंवर सहित कई वक्ताओं ने सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि संविधान को कमजोर किया जा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि यदि लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक जारी रही तो संघर्ष और तेज होगा।
धरने में राधेश्याम चिरानिया, सुरेश, अंजू, बबीता, संजू, सरिता, ओमप्रकाश, प्रेमलता, प्रभुदयाल जागृत, ममता सिंह, हरलाल सिंह बड़वासी, गोविंद राम कल्याण, शेर सिंह महरमपुर, दिलीप सिंह, गोकुल चंद्र, मनोज, बनारसी देवी, रेहान मूलनिवासी, ममता गर्वा समेत बड़ी संख्या में समर्थकों ने भाग लिया और आवाज बुलंद की।






