पचेरी: दिव्यांग खिलाड़ियों की खेल प्रतिभा, आत्मविश्वास और जज़्बे का जीवंत उदाहरण बना पैरा थ्रो बॉल नेशनल फेडरेशन कप 2026 आज झुंझुनूं में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता ने न सिर्फ खेल जगत में समावेशन का मजबूत संदेश दिया, बल्कि यह भी साबित किया कि अवसर मिलने पर दिव्यांग खिलाड़ी किसी से कम नहीं। प्रतियोगिता का समापन समारोह सामाजिक समानता, खेल भावना और प्रेरणादायक क्षणों से भरा रहा।
द पैरा थ्रोबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में देश के विभिन्न राज्यों से आई पुरुष और महिला टीमों ने भाग लिया। पूरे टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों ने अनुशासन, टीम वर्क और प्रतिस्पर्धात्मक भावना का शानदार परिचय दिया। हर मुकाबले में खेल के प्रति समर्पण और आत्मसम्मान साफ नजर आया, जिसने दर्शकों को भावुक भी किया और प्रेरित भी।
पुरुष वर्ग में आंध्र प्रदेश की टीम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया, जबकि तेलंगाना की टीम को दूसरा और हरियाणा को तीसरा स्थान हासिल हुआ। वहीं महिला वर्ग में झारखंड की टीम ने शानदार खेल दिखाते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। राजस्थान की महिला टीम ने फाइनल तक का सफर तय कर उपविजेता स्थान हासिल किया, जबकि तेलंगाना की टीम तीसरे स्थान पर रही।
टूर्नामेंट के दौरान व्यक्तिगत स्तर पर भी खिलाड़ियों ने अपनी छाप छोड़ी। पुरुष वर्ग में आंध्र प्रदेश के बी. पवन कुमार को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया, जबकि महिला वर्ग में झारखंड की महिमा कुमारी ने अपने शानदार खेल से यह सम्मान हासिल किया। दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन को खेल विशेषज्ञों और दर्शकों ने समान रूप से सराहा।

समापन समारोह में भाजपा नेता राजेश दहिया मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि पैरा थ्रो बॉल जैसे खेल दिव्यांग खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का राष्ट्रीय मंच देते हैं और समाज में समान अवसर की सोच को मजबूत करते हैं। कार्यक्रम में सिंघानिया विश्वविद्यालय पचेरी बड़ी के अध्यक्ष रिटायर्ड आईएएस मनोज कुमार भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों ने सफल आयोजन के लिए आयोजकों और खिलाड़ियों को बधाई दी।

समारोह के दौरान प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया। विजेता खिलाड़ियों के चेहरे पर जीत की खुशी और आत्मसम्मान की झलक साफ दिखाई दी, जिसने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया।
आयोजकों ने सभी प्रतिभागी टीमों, तकनीकी अधिकारियों, निर्णायकों, स्वयंसेवकों और खेल प्रेमियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में पैरा थ्रो बॉल जैसे आयोजनों के जरिए दिव्यांग खिलाड़ियों को और अधिक अवसर और पहचान मिलेगी।





