पिलानी: क्षेत्र में पंचायत पुनर्गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ढाणी दरोगा को खुडिया ग्राम पंचायत से हटाए जाने और वार्ड व पंचायत गठन में कथित द्वेषपूर्ण कार्रवाई के विरोध में शुक्रवार को ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आया। स्थानीय भाजपा नेता और पूर्व सरपंच नीतीराज सिंह इस्माईलपुर के नेतृत्व में ढाणी दरोगा और इस्माईलपुर के ग्रामीणों ने पंचायत समिति पिलानी में ही बने रहने की मांग उठाई, वहीं भाजपा नेता राजेश दहिया पर गंभीर आरोप लगाकर पार्टी के भीतर ही सियासी भूचाल पैदा कर दिया।
पंचायत सीमाओं में बदलाव को लेकर क्षेत्र में असंतोष का माहौल देखने को मिला। ढाणी दरोगा को खुडिया ग्राम पंचायत से हटाने के फैसले को ग्रामीणों ने जनभावनाओं के खिलाफ बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से ढाणी दरोगा और इस्माईलपुर का प्रशासनिक, सामाजिक और राजनीतिक जुड़ाव पंचायत समिति पिलानी से रहा है, ऐसे में अचानक किया गया यह बदलाव क्षेत्रीय संतुलन को बिगाड़ने वाला है।
पूर्व सरपंच नीतीराज सिंह इस्माईलपुर ने पंचायत पुनर्गठन प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि यह पूरा घटनाक्रम राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। उन्होंने सीधे तौर पर भाजपा नेता राजेश दहिया को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि पंचायत विभाजन की रूपरेखा उन्हीं के इशारों पर तय की गई। नीतीराज सिंह का कहना है कि ऐसे फैसलों के कारण भाजपा का पारंपरिक वोट बैंक लगातार कमजोर हो रहा है और पार्टी को जमीनी स्तर पर नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ढाणी दरोगा और इस्माईलपुर के ग्रामीणों ने एक स्वर में मांग रखी कि दोनों गांवों को पंचायत समिति पिलानी में ही रखा जाए। साथ ही पंचायत समिति सदस्य गठन में खुडिया को भी इनके साथ जोड़ा जाए, जिससे क्षेत्र की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक एकरूपता बनी रहे। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इस मामले में शीघ्र न्यायोचित निर्णय नहीं लिया गया, तो इसका सीधा असर आगामी चुनावों में देखने को मिल सकता है।
मामले को और तूल देते हुए नीतीराज सिंह ने एक और सनसनीखेज आरोप सामने रखा। उन्होंने दावा किया कि कुछ समय पूर्व खुडिया स्टैंड पर लगे “राजेन्द्र राठौड़ मुर्दाबाद” के नारे भी राजेश दहिया के इशारे पर ही लगवाए गए थे। नीतीराज सिंह ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े ठोस प्रमाण उनके पास मौजूद हैं, जिन्हें जल्द ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
पंचायत पुनर्गठन को लेकर उपजे इस विवाद ने भाजपा के भीतर बढ़ते असंतोष को उजागर कर दिया है। ग्रामीणों और स्थानीय नेताओं की नाराजगी यह संकेत दे रही है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो इसका असर आगामी पंचायत और विधानसभा चुनावों में पार्टी को भुगतना पड़ सकता है।





