तेहरान: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोघदाम ने दावा किया है कि डोनाल्ड ट्रंप ने रात करीब एक बजे तेहरान से संपर्क कर ईरान पर हमले को रोकने के बदले प्रदर्शनकारियों की सजा रद्द करने की शर्त रखी थी। इसी बातचीत के तुरंत बाद हालात बदल गए और 800 लोगों की फांसी रोकने का फैसला हो गया। इस खुलासे ने पूरी दुनिया की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।
आधी रात का फोन कॉल: ट्रंप ने क्यों बदली रणनीति?
पाकिस्तान में तैनात ईरानी राजदूत रजा अमीरी मोघदाम ने दावा किया कि व्हाइट हाउस में मौजूद डोनाल्ड ट्रंप ने आधी रात ईरान को संदेश भेजा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अमेरिका ईरान पर हमला नहीं करना चाहता, लेकिन तेहरान को संयम दिखाना होगा और अमेरिकी हितों पर प्रहार नहीं होना चाहिए। रिपोर्ट्स के अनुसार यह संदेश सभी सरकारी स्तरों पर प्रसारित हुआ और सुबह तक ईरानी अधिकारियों के पास पहुंच गया।
समझौते की कथित शर्त: 800 प्रदर्शनकारियों की मौत की सजा रद्द
मोघदाम ने बताया कि ट्रंप ने एक ही शर्त रखी— उन 800 प्रदर्शनकारियों की फांसी रोक दी जाए जिन्हें मौत की सजा सुनाई जा चुकी थी। यह दावा किया जा रहा है कि तेहरान ने तुरंत इस शर्त पर कार्रवाई की और सुबह होते ही फांसी रोकने का एलान कर दिया। यह कदम ऐसे समय सामने आया जब देश में सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों ने प्रशासन को झकझोर रखा था।
मौत का आंकड़ा बढ़ा, इंटरनेट एक सप्ताह से बंद
मानवाधिकार संगठनों की मानें तो ईरान में दमन अभियान की कीमत हजारों लोग चुका रहे हैं। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक अब तक 3,428 नागरिकों की मौत हो चुकी है। इंटरनेट एक सप्ताह से बंद है और देश के कई शहरों में संपर्क पूरी तरह ठप है, जिसके चलते जमीन से सही तस्वीर बाहर नहीं आ पा रही।
ईरान-अमेरिका रिश्तों में नया मोड़?
यह खुलासा पहले से चल रहे तनाव में नई परत जोड़ता है। ईरान दावा करता रहा है कि वह बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा, जबकि अमेरिका बार-बार यह चेतावनी देता रहा है कि पश्चिमी ठिकानों पर कोई हमला हुआ तो कार्रवाई की जाएगी। ट्रंप का कथित हस्तक्षेप इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वॉशिंगटन भी हालात को और भड़काना नहीं चाहता।
वैश्विक प्रतिक्रिया: झटका, सवाल और संशय
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि यह खुलासा भरोसे से परे भी हो सकता है, लेकिन यदि बातचीत सच में हुई है तो यह सिर्फ सैन्य मुकाबले से बचने का निजी सौदा नहीं बल्कि मध्य पूर्व की कूटनीति में बड़ा मोड़ भी हो सकता है।कई विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट के चलते जमीन पर स्थिति का स्वतंत्र सत्यापन लगभग असंभव है।





