नवलगढ़: डूंडलोद क्षेत्र में 150 वर्ष पुराने हेरिटेज स्मारक गोयनका छतरी ने बुधवार को नया इतिहास रचा, जब झुंझुनूं जिला कलेक्टर अरुण गर्ग ने स्वयं स्थल पर पहुंचकर निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने हेरिटेज संरक्षण, टूरिज्म डेवलपमेंट और सांस्कृतिक धरोहर बचाने के महत्व पर जोर देते हुए स्थानीय संस्थानों और युवाओं से सक्रिय योगदान देने की अपील की।
150 साल पुरानी धरोहर पर जिला प्रशासन की नजर
नवलगढ़ के डूंडलोद में स्थित रामचंद्र गोयनका चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा निर्मित यह ऐतिहासिक छतरी लगभग 150 वर्ष पुरानी है। इस अनूठी हेरिटेज साइट में क्षेत्रीय कला, स्थापत्य शैली और राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान का मिश्रण दिखाई देता है। निरीक्षण के दौरान जिला कलेक्टर अरुण गर्ग ने हेरिटेज स्मारकों की वास्तविक स्थिति को करीब से देखा और कहा कि ऐसे संरक्षित धरोहरों को पर्यटन एवं शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।
प्राचीन कुएं के जीर्णोद्धार कार्य की प्रशंसा
डूंडलोद में गोयनका ट्रस्ट द्वारा करवाया गया दशकों पुराना कुआं नवनिर्माण और संरक्षण के बाद देखने योग्य बन चुका है। जिला कलेक्टर ने कुएं की मौलिक संरचना को सहेजते हुए किए गए इस जीर्णोद्धार को सराहनीय पहल बताते हुए स्थानीय संगठनों को इसी दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
स्थानीय प्रतिनिधियों ने दिया सहयोग
अवलोकन के दौरान टूरिज्म से जुड़े कई सक्रिय नागरिक उपस्थित रहे। अशोक सिंह ठाकुर और राघवेंद्र सिंह डूंडलोद ने हेरिटेज विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा की। टूरिज्म विभाग के देवेंद्र सिंह और श्रुत्ति ने भविष्य में पर्यटक सुविधाओं के विस्तार पर विचार साझा किया। गोयनका ट्रस्ट प्रबंधक प्रद्युम्न शर्मा ने संरक्षण कार्य की प्रगति बताई। सामाजिक कार्यकर्ता सचिन सैनी और भीम सिंह बडगुर्जर ने क्षेत्रीय समुदाय की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
कलेक्टर ने सभी उपस्थित लोगों से अपील करते हुए कहा कि राजस्थान के ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित रखकर ही आने वाली पीढ़ियों तक सांस्कृतिक विरासत पहुंचाई जा सकती है।





