चिड़ावा: नगर पालिका क्षेत्र में अतिक्रमण हटाओ अभियान एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिस कार्रवाई को शहर में सख्ती का संकेत माना जा रहा था, वह नगरपालिका ईओ रोहित मील के एपीओ होते ही ठप पड़ गई। अभियान के अचानक रुकने से न सिर्फ सरकारी मंशा पर सवाल उठे हैं, बल्कि राजनीतिक दबाव और सरकारी धन के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं।
ईओ रोहित मील के नेतृत्व में शुरू हुआ अभियान, रास्ते में ही थम गया
नगरपालिका प्रशासन ने 12 नवंबर को पिलानी रोड बाइपास चौराहे से अतिक्रमण हटाओ अभियान की शुरुआत की थी। रोहित मील के नेतृत्व में यह कार्रवाई मंड्रेला रोड तिराहे से मंड्रेला रोड-बाइपास चौराहे और फिर पिलानी रोड-बाइपास चौराहे से कबूतर खाना चौक स्थित उप जिला अस्पताल तक पहुंची। इस दौरान सड़क के दोनों ओर बने कच्चे-पक्के अतिक्रमण हटाए गए और शहर में सख्ती का माहौल बना।
उप जिला अस्पताल तक पहुंचकर खत्म हो गया अभियान
अभियान का अंतिम चरण कबूतर खाना चौक पर देखने को मिला, जहां उप जिला अस्पताल के सामने लंबे समय से लगी चाय-पानी की थड़ियों को 18 दिसंबर को हटाया गया। इसके बाद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। महज चार दिन बाद, 22 दिसंबर को रोहित मील को एपीओ कर दिया गया और यहीं से अतिक्रमण हटाओ अभियान की गति पूरी तरह थम गई।
ईओ बदलते ही कार्रवाई पर ब्रेक, सवालों में नगरपालिका प्रशासन
रोहित मील के एपीओ होने के बाद विद्याविहार नगरपालिका पिलानी के ईओ सुनील सैनी को चिड़ावा नगरपालिका का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया, लेकिन इसके बावजूद शहर में अतिक्रमण हटाने की कोई नई कार्रवाई शुरू नहीं हुई। अभियान जहां रुका था, वहीं ठहर गया, जिससे प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर सवाल उठने लगे।
राजनीतिक दबाव में बंद हुआ अभियान? शहरवासियों के गंभीर आरोप
शहरवासियों का कहना है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान राजनीतिक दबाव के चलते बंद किया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पूरी कार्रवाई का उद्देश्य केवल उप जिला अस्पताल के सामने लगी थड़ियों को हटवाना था और जैसे ही यह लक्ष्य पूरा हुआ, अभियान को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। लोगों का यह भी कहना है कि प्रभावशाली अतिक्रमणों पर जानबूझकर कार्रवाई नहीं की गई।
अभियान बंद होते ही लौट आया अतिक्रमण, सरकारी धन के दुरुपयोग पर भी सवाल
अभियान के अचानक रुकने का असर यह हुआ कि जिन स्थानों से अतिक्रमण हटाया गया था, वहां दोबारा कब्जे शुरू हो गए। इससे सरकारी धन और संसाधनों के उपयोग पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। शहरवासियों का मानना है कि यदि अभियान को लगातार और निष्पक्ष रूप से चलाया जाता, तो अतिक्रमण की समस्या पर स्थायी नियंत्रण संभव था।
फिर करेंगे कार्यवाही: ईओ सुनील सैनी
चिड़ावा ईओ सुनील सैनी ने बताया कि अतिक्रमण हटाना एक नियमित कार्यवाही है जो जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि बावलिया बाबा मेले की वजह से नगरपालिका स्टाफ व्यस्त था जिसके चलते अभियान को रोक दिया गया था।





