Wednesday, February 18, 2026
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उदयपुरवाटी में 6वें दिन भी नहीं टूटी भूख हड़ताल, वकीलों की बिगड़ती हालत से बढ़ा तनाव, अधिवक्ता ने विरोध में करवाया मुंडन

उदयपुरवाटी: विधानसभा क्षेत्र में गुढ़ागौड़जी को उदयपुरवाटी से जोड़ने की मांग को लेकर चल रहा वकीलों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। 6वें दिन भी भूख हड़ताल जारी रहने से बार अध्यक्ष श्रवण सैनी और अधिवक्ता हनुमान गुर्जर की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई है। कोर्ट परिसर में न्यायिक कार्य पूरी तरह ठप है, जबकि हाईकोर्ट वकीलों और सामाजिक संगठनों का समर्थन बढ़ता जा रहा है। इस आंदोलन ने झुंझुनूं जिले की राजनीति और प्रशासन दोनों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।

उदयपुरवाटी कोर्ट परिसर में पिछले 6 दिनों से चल रही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल अब स्वास्थ्य संकट में तब्दील होती नजर आ रही है। आंदोलन की अगुवाई कर रहे बार अध्यक्ष श्रवण सैनी और अधिवक्ता हनुमान गुर्जर की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। चिकित्सकीय सलाह के बावजूद दोनों ने मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया है, जिससे वकील समुदाय और आमजन में चिंता गहराती जा रही है।

भूख हड़ताल के चलते उदयपुरवाटी कोर्ट परिसर में न्यायिक कार्य पूरी तरह ठप हो गया है। मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है, जिससे दूर-दराज से आने वाले वादकारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह स्थिति सरकार की उदासीनता का नतीजा है, जो अब न्याय व्यवस्था पर भी असर डाल रही है।

आंदोलन को और अधिक तीव्र करते हुए एक अधिवक्ता ने सार्वजनिक रूप से मुंडन कर सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। इस प्रतीकात्मक कदम ने आंदोलन को भावनात्मक और सामाजिक स्तर पर और मजबूत कर दिया है। कोर्ट परिसर में मौजूद वकीलों और समर्थकों ने इसे प्रशासन को जगाने की अंतिम चेतावनी बताया।

उदयपुरवाटी वकीलों के समर्थन में अब हाईकोर्ट के अधिवक्ता भी खुलकर सामने आ गए हैं। इसके साथ ही विभिन्न सामाजिक संगठनों ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर समर्थन जताना शुरू कर दिया है। समर्थन बढ़ने से आंदोलन का दायरा झुंझुनूं जिले से आगे फैलता नजर आ रहा है।

वकीलों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गुढ़ागौड़जी को उदयपुरवाटी से न जोड़ना क्षेत्रीय विकास के साथ सीधा अन्याय है। इस मुद्दे पर लंबे समय से मांग उठाई जा रही है, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसी अनदेखी के चलते जनाक्रोश अब आंदोलन में बदल चुका है।

आंदोलनकारियों ने भाजपा सरकार पर वादों और जमीनी हकीकत में फर्क का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि चुनावी घोषणाओं में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की बात की गई थी, लेकिन अब मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। वकीलों ने स्पष्ट किया कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।

वकीलों और समर्थक संगठनों ने प्रशासन और सरकार को साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को उग्र किया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी। इलाके में तनावपूर्ण माहौल बनता जा रहा है, जिसे लेकर पुलिस-प्रशासन भी सतर्क है।

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