उदयपुरवाटी: में प्रशासनिक पुनर्गठन को लेकर वकीलों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। गुढ़ागौड़जी तहसील को पुनः उदयपुरवाटी से जोड़ने की मांग को लेकर बार संघ के अधिवक्ता दूसरे दिन भी भूख हड़ताल पर डटे रहे। वकीलों के न्यायालय बहिष्कार से न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहा है, जिससे आम जनता को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उदयपुरवाटी बार संघ के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने लगातार दूसरे दिन भी भूख हड़ताल जारी रखी। आंदोलन का मुख्य उद्देश्य गुढ़ागौड़जी तहसील को फिर से उदयपुरवाटी से जोड़ने की मांग को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है। वकीलों का कहना है कि प्रशासनिक पुनर्गठन से क्षेत्रीय संतुलन और न्यायिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
आंदोलन में बार संघ अध्यक्ष श्रवण सैनी प्रमुख रूप से भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। उनके साथ एडवोकेट हनुमान सिंह गुर्जर भी धरने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि मांग पूरी होने तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
उदयपुरवाटी बार संघ ने न्यायालयों के बहिष्कार का निर्णय लिया है, जिससे कोर्ट से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई प्रभावित हुई है। वकीलों के आंदोलन के चलते आम नागरिकों को केसों की सुनवाई, दस्तावेजी कार्य और कानूनी प्रक्रियाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि प्रशासनिक पुनर्गठन के दौरान गुढ़ागौड़जी तहसील को अलग किए जाने से क्षेत्रीय प्रशासनिक असंतुलन उत्पन्न हुआ है। नीमकाथाना जिले को निरस्त किए जाने के बावजूद पुनर्गठन से जुड़ा विवाद अभी भी बरकरार है, जिससे क्षेत्र में असंतोष का माहौल बना हुआ है।
बार संघ ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक और उग्र रूप दिया जाएगा। वकीलों का कहना है कि वे न्यायिक व्यवस्था और क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
न्यायालयों के बंद रहने से आम लोगों को मामलों की सुनवाई में देरी, दस्तावेजी अड़चनें और कानूनी प्रक्रियाओं में अवरोध का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की अपील की है।





